निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा, राजनीतिक लाभ के लिए किया इस्तेमाल: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत से इनकार करते हुए कहा
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक लाभ पाने के लिए निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा है और मामले में हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने कहा कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं है बल्कि इसमें गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनकी जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि खेड़ा को दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए और इस पूरे प्रकरण में और कौन लोग शामिल हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“यदि आरोप केवल मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए जाते तो इसे राजनीतिक बयानबाजी माना जा सकता था लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीटना उचित नहीं है।”
मामला असम के मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR से जुड़ा है, जिसमें कई गंभीर धाराएं लगाई गईं, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं।
अदालत ने यह भी पाया कि पवन खेड़ा यह साबित करने में असफल रहे कि संबंधित महिला के पास अन्य देशों के पासपोर्ट हैं या उन्होंने विदेश में कंपनी बनाकर बड़ी रकम का निवेश किया है।
इससे पहले तेलंगाना हाRकोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की अंतरिम राहत दी थी ताकि वह संबंधित अदालत में याचिका दायर कर सकें। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस राहत पर रोक लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उसके विचार में यह रोक बाधा नहीं बनेगी।
=इसके बावजूद गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। साथ ही स्पष्ट किया कि जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।