बिना धोखाधड़ी के रिटायर कर्मचारी से अतिरिक्त ग्रेच्युटी की वसूली नहीं हो सकती: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दोहराया कि यदि किसी रिटायर कर्मचारी को विभाग की गणना के आधार पर अधिक ग्रेच्युटी का भुगतान हुआ हो और उसमें कर्मचारी की कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी न हो तो उससे वह राशि वापस नहीं ली जा सकती।
जस्टिस बुडी हाबुंग ने कहा कि कर्मचारी रिटायर हो चुका है, ग्रेच्युटी की गणना विभाग ने स्वयं की थी और भुगतान भी विभाग ने ही किया था। ऐसे में बाद में विभागीय पुनर्गणना के आधार पर वसूली करना कानूनसम्मत नहीं है।
अदालत ने कहा,
“जब अधिक भुगतान विभाग की अपनी गणना के कारण हुआ हो और कर्मचारी की ओर से कोई मिथ्या प्रस्तुति या धोखाधड़ी न हो तब ऐसी वसूली मनमानी और कानून के विपरीत है।”
मामले में याचिकाकर्ता वन विभाग में अधिकारी थे, जो 2011 में सहायक वन संरक्षक के पद से रिटायर हुए। उन्हें प्रारंभ में लगभग 6.76 लाख रुपये ग्रेच्युटी दी गई। बाद में पेंशन संशोधन के बाद अतिरिक्त राशि जोड़कर कुल भुगतान 8.30 लाख रुपये कर दिया गया।
इसके बाद विभाग ने तकनीकी त्रुटि बताते हुए कहा कि अधिकतम देय राशि 7 लाख रुपये थी और 1.30 लाख रुपये अतिरिक्त दे दिए गए, जिसकी वसूली का आदेश जारी कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अतिरिक्त भुगतान की जिम्मेदारी विभाग की है, कर्मचारी की नहीं।
अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वसूल की गई राशि तीन माह के भीतर वापस की जाए। देरी होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।