उत्तम नगर होली झड़प: हाईकोर्ट ने सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिए पुलिस को ईद के दौरान जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह सभी ज़रूरी कदम उठाए ताकि ईद के त्योहार के दौरान आम जनजीवन में कोई रुकावट न आए। यह निर्देश उत्तम नगर में हुई एक घटना के संदर्भ में दिया गया, जहां होली के दौरान हुई एक झड़प में 26 साल के एक युवक की हत्या कर दी गई थी।
कोर्ट ने पुलिस को आगे यह भी निर्देश दिया कि वे ऐसी व्यवस्था करें जिससे "सभी लोगों में सुरक्षा और बचाव का एहसास पैदा हो" और अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि समाज के किसी भी तबके के "किसी भी व्यक्ति" को ऐसी "शरारत करने की इजाज़त न दी जाए जिससे कोई अप्रिय स्थिति पैदा होने की आशंका हो"।
कोर्ट 'एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स' (APCR) की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राज्य और पुलिस अधिकारियों को बढ़ती सांप्रदायिक तनाव के खिलाफ कार्रवाई करने में कथित विफलता को लेकर तत्काल निर्देश देने की मांग की गई।
कुछ समय तक मामले की सुनवाई करने के बाद चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की एक खंडपीठ ने अपने आदेश में यह निर्देश दिया:
"ईद खुशी मनाने का त्योहार है। यह सभी संबंधित लोगों का कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि ऐसे पवित्र अवसर पर किसी भी व्यक्ति या समाज के किसी भी वर्ग द्वारा की गई गुंडागर्दी जैसी किसी भी अप्रिय घटना के कारण जनजीवन बाधित न हो। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह राज्य, विशेष रूप से पुलिस बल का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक नागरिक अपने धार्मिक अधिकारों का पालन कर सके और त्योहारों को मना सके। याचिका में व्यक्त की गई आशंकाएं 4 मार्च को हुई घटना पर आधारित प्रतीत होती हैं। इसलिए पुलिस को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
ईद शांतिपूर्वक संपन्न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस द्वारा विभिन्न कदम उठाए गए; लेकिन हम इस बात पर जोर देना चाहेंगे कि यदि स्थिति के आकलन के आधार पर व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की कोई आवश्यकता उत्पन्न होती है तो तत्काल आवश्यक उपाय किए जाएंगे। निवारक कार्रवाई करने के अलावा, पुलिस से यह अपेक्षा की जाती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि समाज के सभी वर्ग पिछली घटनाओं को ध्यान में रखते हुए संयम बनाए रखें।
याचिका में वर्णित स्थिति न केवल अधिकारियों से निरंतर और कड़ी निगरानी रखने की मांग करती है, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों के सदस्यों से भी यह अपेक्षा करती है कि वे संयम बनाए रखें और इस प्रकार आचरण करें जिससे शांति और सद्भाव को बढ़ावा मिले, न कि कोई ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जो विकट रूप धारण कर ले। हम क्षेत्र की पुलिस और नागरिक प्रशासन को निर्देश देते हैं कि वे कानून के तहत अनुमेय सभी आवश्यक कदम उठाएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि स्थिति कोई विकट मोड़ न ले और एक ऐसा वातावरण निर्मित हो जो शांतिपूर्ण ईद के लिए अनुकूल हो। पुलिस व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे सभी लोगों में सुरक्षा और संरक्षा की भावना जागृत हो। अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि समाज के किसी भी वर्ग के किसी भी व्यक्ति को ऐसी कोई शरारत करने की अनुमति न दी जाए, जिसमें कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न करने की क्षमता हो।"
अदालत ने निर्देश दिया कि वर्तमान में लागू पुलिस व्यवस्था रामनवमी के त्योहार तक जारी रहेगी।
अपने आदेश में अदालत ने उस याचिका का संज्ञान लिया, जिसमें कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका व्यक्त की गई; याचिकाकर्ता के अनुसार, इस स्थिति के कारण कल को मनाए जाने वाले ईद के दिन जनजीवन बाधित हो सकता है।
अदालत ने यह बात अपने आदेश में कही,
"याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिका में जो आशंका जताई गई, उसकी वजह 4 मार्च को हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इस घटना में 26 साल के एक युवक की मौत हो गई। हालांकि, यह घटना स्थानीय स्तर की थी, लेकिन इस मौत पर अलग-अलग समुदायों के लोगों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि इस घटना के बाद समाज के कुछ तबके ईद के मौके पर आम जनजीवन को बाधित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति को टालना ज़रूरी है और अधिकारियों को इसके लिए सभी ज़रूरी एहतियाती कदम उठाने चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर हर तरह की पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनसे समाज के अलग-अलग तबकों में तनाव फैल रहा है। इन पोस्ट पर भी रोक लगनी चाहिए और इनके संबंध में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।"
अदालत ने दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे स्टैंडिंग काउंसिल की दलीलों पर भी गौर किया। उन्होंने स्थानीय पुलिस से मिले निर्देशों के आधार पर अदालत को बताया कि 5 मार्च से ही पुलिस की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए। ये इंतज़ाम चौबीसों घंटे लागू हैं—न सिर्फ़ उस जेजे कॉलोनी में, जहां यह घटना हुई थी, बल्कि उसके आस-पास के इलाकों में भी।
कोर्ट को बताया गया कि सुरक्षा इंतज़ामों के लिए काफ़ी संख्या में पुलिसकर्मी, यहां तक कि CAPF के जवान भी पहले ही तैनात कर दिए गए ताकि यह पक्का हो सके कि ईद का त्योहार बिना किसी अप्रिय घटना के गुज़र जाए। वकील ने आगे कहा कि "द्वारका ज़िले के सभी 11 पुलिस स्टेशनों में हथियारबंद पुलिसकर्मियों की 8 कंपनियाँ तैनात की गईं" और "400 पुलिसकर्मियों वाली चार कंपनियां निगरानी पर हैं, जिनमें स्थानीय भाषा जानने वाले जवान भी शामिल हैं ताकि ज़िला बल के 400 हथियारबंद जवानों के साथ मिलकर क़ानून-व्यवस्था बनी रहे"।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि सोशल मीडिया की निगरानी अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर की जा रही है और पुलिस के निर्देशों पर 50 भड़काऊ पोस्ट हटा दिए गए और अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म से 174 पोस्ट हटाने का अनुरोध किया गया। इसके अलावा, पुलिस ने एक सघन सत्यापन कार्यक्रम चलाया और इलाक़े में 8862 लोगों की पृष्ठभूमि की जांच की गई। साथ ही पुलिस स्टेशन और ज़िला स्तर पर अमन कमेटियों की बैठकें भी आयोजित की गईं। इसके अलावा, कई बैठकें भी हुईं और पिछले दो हफ़्तों में लगभग 30 बैठकें हुई हैं, कोर्ट को यह जानकारी दी गई।
मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय करते हुए कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और पुलिस के सरकारी वकील से मौखिक रूप से कहा,
"कृपया अपने अधिकारियों को निर्देश दें कि वे किसी भी तरह की ढिलाई न बरतें। क्योंकि दिल्ली में जो कुछ भी होता है, उसका असर दूर तक होता है..."
शुरुआत में ही कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील से मौखिक रूप से पूछा कि उन्होंने क्या कदम उठाए।
इस पर पुलिस के सरकारी वकील ने कहा,
"हमने पहले ही कदम उठा लिए हैं। मैं खुली अदालत में उन्हें पढ़कर नहीं सुनाना चाहता।"
इस बीच एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि पुलिस ने "हालात को बहुत ही कुशलता से संभाला है"। इस मोड़ पर APCR की ओर से पेश सीनियर वकील नित्या रामकृष्णन ने कहा, "हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।"
पुलिस के सरकारी वकील ने आगे कहा,
"CAPF बल मार्च की शुरुआत से ही वहां तैनात है। वे हालात पर नज़र रखे हुए हैं। वे वहां मौजूद हैं, और ईद के बाद भी वहीं रहेंगे। स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।"
ASG ने बताया कि ज़िला पुलिस के अलावा, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की चार कंपनियाँ भी तैनात की गईं।
ASG ने कहा,
"सुरक्षा के लिहाज़ से यह इलाक़ा पूरी तरह से अभेद्य बना दिया गया।"
पुलिस के वकील ने आगे कहा कि पुलिस सभी ज़िलों पर लगातार नज़र रखे हुए है।
हालांकि, रामकृष्णन ने कहा,
"हमें खुशी है कि वे (पुलिस) ऐसा कर रहे हैं, लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं। उत्तम नगर पार्क में लोग इकट्ठा हुए और सरेआम हत्या का आह्वान किया।"
उनकी दलीलों पर आपत्ति जताते हुए ASG ने कहा,
"यह पब्लिसिटी पाने का कोई खुला रास्ता नहीं हो सकता। हम इस पर आपत्ति जता रहे हैं।"
इस स्टेज पर कोर्ट ने रामकृष्णन से मौखिक रूप से कहा:
"हम आपसे अनुरोध करेंगे कि आप संयम बरतें। कल आपके द्वारा किए गए अनुरोध पर विचार करते हुए कोर्ट भी चिंतित है। हमने कल इस मामले की सुनवाई की अनुमति दी थी। आज भी किसी तरह इसकी सुनवाई हो रही है। पुलिस की पर्याप्त तैनाती की गई। एडिशनल DCP भी मौजूद हैं। चिंताओं को देखते हुए वह खुद मौजूद हैं। हम यह नहीं कह सकते कि उन्हें स्थिति की जानकारी नहीं है। हम आपसे और याचिकाकर्ता से केवल यही अनुरोध करेंगे कि स्थिति को और न भड़काएं। हम उनके द्वारा उठाए गए कदमों को रिकॉर्ड करेंगे और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि ऐसा ही किया जाए। इस समय तत्काल चिंता किसी भी ऐसी घटना को रोकना है। उन्हें ऐसी किसी भी चीज़ को रोकना होगा। मुझे उम्मीद और भरोसा है कि वे उस इलाके में कार्रवाई कर रहे होंगे। अगर नहीं तो हम उन्हें निर्देश दे रहे हैं। कोर्ट और क्या कर सकते हैं? 800 CAPF जवानों की तैनाती..."
रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि क्या पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए उचित घोषणाएं कर सकती है कि लोगों को मस्जिदों में जाने से डर न लगे। इस पर ASG ने कहा कि यह कदम पहले से ही उठाया जा चुका है और एक नोट का हवाला दिया।
रामकृष्णन ने तर्क दिया कि उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए, जिनकी पहचान कथित अपराधों को अंजाम देने वालों के रूप में हुई, जिस पर ASG शर्मा ने कहा कि कानून अपना काम करेगा।
कोर्ट ने आगे कहा,
"वे कार्रवाई कर रहे हैं। हम अपने आदेश में सब कुछ शामिल करेंगे और यदि आवश्यकता हुई तो हम कहेंगे कि वे और बल तैनात करें और उपाय करें।"
मामले की पृष्ठभूमि
APCR के अनुसार, इस घटना के बाद राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों, जिसमें उत्तम नगर भी शामिल है, उसमें "आक्रोश सभाओं" सहित कई रैलियां और सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें खुले तौर पर अत्यधिक भड़काऊ और उत्तेजक भाषण दिए गए, जो "मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले थे।"
APCR ने कहा कि स्थिति इस डर से और भी बिगड़ गई कि ईद के शांतिपूर्ण पालन में बाधाएं आएंगी और ये बाधाएं निगरानी समूहों (Vigilante Groups) और पुलिस, दोनों की ओर से हो सकती हैं।
याचिका के अनुसार, बाधा डालने और जवाबी कार्रवाई के लिए चल रही अपीलों को देखते हुए सांप्रदायिक तनाव और लक्षित हिंसा के और बढ़ने की विश्वसनीय आशंकाएं हैं।
04 मार्च को जेजे कॉलोनी में तरुण नाम के 26 वर्षीय एक युवक की उसके परिवार और पड़ोसियों के बीच हुई झड़प में हत्या कर दी गई। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह हिंसा होली के जश्न के दौरान तब शुरू हुई, जब तरुण के परिवार की एक लड़की द्वारा फेंके गए गुब्बारे का पानी पड़ोस के परिवार की एक महिला पर जा गिरा। पुलिस ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया और दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है।
Title: ASSOCIATION FOR PROTECTION OF CIVIL RIGHTS (APCR) v. STATE OF NCT OF DELHI & ORS