'सरकारी ज़मीन को बंधक नहीं बनाया जा सकता': UNI न्यूज़ एजेंसी केस में दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के जाने-माने सेंट्रल दिल्ली इलाके में यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया (UNI) को अलॉट की गई ज़मीन का अलॉटमेंट रद्द करने के फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सरकारी ज़मीन को कोई ऐसा लाइसेंसी "बंधक" नहीं बना सकता, जो उस मकसद को ही पूरा करने में नाकाम रहा हो, जिसके लिए उसे ज़मीन अलॉट की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम को रफ़ी मार्ग स्थित UNI के दफ़्तर को सील किया।
यह कार्रवाई तब हुई, जब जस्टिस सचिन दत्ता ने अपने 98 पन्नों के आदेश में कहा कि यह न्यूज़ एजेंसी अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने में नाकाम रहने के बावजूद, 45 साल से भी ज़्यादा समय से सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा जमाए बैठी थी।
बता दें, यह ज़मीन असल में न्यूज़ मीडिया संगठनों के लिए एक कॉम्प्लेक्स ऑफ़िस बनाने के मकसद से अलॉट की गई, लेकिन दशकों तक इस पर कोई काम नहीं हुआ।
UNI ने 2023 में हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस (L&DO) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में उसका अलॉटमेंट रद्द किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि इतने सालों में कई बार अलॉटमेंट लेटर जारी किए जाने और कई मौके दिए जाने के बावजूद, बिल्डिंग बनाने या अलॉटमेंट की शर्तों का पालन करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कोर्ट ने कहा,
"याचिकाकर्ता को अलग-अलग अलॉटमेंट लेटर के तहत जो अधिकार दिए गए, वे एक 'सामान्य लाइसेंसी' (Bare Licensee) के अधिकारों जैसे ही थे। ज़ाहिर है, याचिकाकर्ता का लाइसेंस कभी भी रद्द किया जा सकता है, खासकर तब जब वह उस मकसद को ही पूरा करने में 45 साल से भी ज़्यादा समय से पूरी तरह नाकाम रहा हो, जिसके लिए उसे यह लाइसेंस दिया गया।"
दरअसल, कोर्ट का मानना था कि L&DO ने UNI को उसकी लगातार लापरवाही और काम न करने के बावजूद, ज़रूरत से ज़्यादा और बेवजह की ढील दी थी।
कोर्ट ने कहा,
"अलॉटमेंट रद्द करने का फ़ैसला बिल्कुल सही है, क्योंकि इसमें इस बात का ध्यान रखा गया कि याचिकाकर्ता बिल्डिंग बनाने में पूरी तरह नाकाम रहा और उसकी तरफ़ से लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसका कोई वाजिब कारण भी नहीं बताया गया।"
कोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले के तथ्यों से यह साफ़ होता है कि एक लाइसेंसी ने सरकारी ज़मीन को दशकों तक बंधक बनाकर रखा, जबकि वह अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने में पूरी तरह नाकाम रहा था।
इसमें कहा गया,
“इस तरह का बर्ताव, सरकारी ज़मीन के आवंटन के लिए बने नियमों की बुनियाद पर ही चोट करता है। इसलिए आवंटन रद्द करना पूरी तरह से सही और कानूनी तौर पर ज़रूरी था... सरकारी संपत्ति पर मिला लाइसेंस कोई इनाम या खैरात नहीं है, जिसका मज़ा लाइसेंस पाने वाला अपनी मर्ज़ी से ले सके... सरकारी ज़मीन को किसी ऐसे डिफ़ॉल्टर लाइसेंस पाने वाले के कब्ज़े में बंधक नहीं बनने दिया जा सकता, जो उस मकसद को ही पूरा करने में नाकाम रहा हो जिसके लिए उसे लाइसेंस दिया गया।”
Case title: United News of India v. Union Of India Through Land And Development Officer Ministry Of Housing And Urban Affairs & Anr