POCSO Act | 15 साल के लड़के से यौन-संबंध बनाने वाली महिला को जमानत, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- पीड़ित की माँ को कोई आपत्ति नहीं

Update: 2026-07-20 14:22 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 साल की महिला को ज़मानत दी, जिस पर POCSO Act, 2012 के तहत नाबालिग लड़के के साथ यौन शोषण का आरोप है। कोर्ट ने देखा कि पीड़ित की माँ को उसकी रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते वह भविष्य में ऐसा कोई काम न करे। [2026 LiveLaw (Del) 664]

जस्टिस मनोज जैन ने यह आदेश चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) और POCSO Act की धारा 6 और 8 के तहत दर्ज FIR से जुड़ी ज़मानत अर्जी पर सुनाया।

यह FIR पीड़ित की माँ की PCR कॉल के आधार पर दर्ज की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी महिला ने उनके नाबालिग बेटे के साथ ज़बरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी थी और उसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़ित का बयान शामिल था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी महिला शिकायतकर्ता की पड़ोसी है। उसने फरवरी 2026 में 15 साल के लड़के को अपने घर बुलाया और उसके साथ ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाए। यह भी आरोप लगाया गया कि बाद में मार्च 2026 में उसने लड़के के घर पर भी उसके साथ यौन शोषण किया और उसे घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी दी।

दूसरी ओर, आरोपी महिला ने तर्क दिया कि आरोप झूठे हैं और दोनों पक्षों के बीच पारिवारिक विवाद के कारण लगाए गए। उसने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वह तीन साल की बच्ची की माँ है और जेल में रहने के कारण बच्ची की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

कोर्ट ने देखा कि आरोपी महिला 20 साल की है, साढ़े तीन महीने से ज़्यादा समय से हिरासत में है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। जेल में उसका व्यवहार भी संतोषजनक पाया गया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया,

"...पीड़ित लड़के की माँ ने कहा कि उन्हें ज़मानत देने में कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते आरोपी महिला को भविष्य में ऐसी कोई हरकत या कोशिश न करने का निर्देश दिया जाए।"

आवेदक के वकील ने यह भी कहा कि वह शिकायतकर्ता के परिवार से पूरी तरह दूर रहेंगी और अपनी मौजूदा जगह से कहीं और रहने चली जाएंगी।

इसलिए कोर्ट ने इस शर्त पर ज़मानत मंज़ूर की कि आवेदक एक पर्सनल बॉन्ड जमा करेंगी, गवाहों से संपर्क नहीं करेंगी और केस चलने के दौरान अपना मोबाइल फ़ोन चालू रखेंगी।

Case Title: Anjali v. State of NCT of Delhi

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