पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे 'फिजिक्स वाला' के संस्थापक अलख पांडे, अश्लील और व्यावसायिक दुरुपयोग पर रोक की मांग

Update: 2026-08-04 08:13 GMT

टीचर और फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम, चेहरे, आवाज, शैली और पहचान का सोशल मीडिया तथा अन्य प्लेटफॉर्म पर व्यावसायिक लाभ कमाने, अश्लील सामग्री प्रसारित करने और मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अलख पांडे की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट जे. साई दीपक से कहा कि वह प्रतिवादियों द्वारा किए गए कथित उल्लंघनों का श्रेणीवार विवरण तालिका के रूप में प्रस्तुत करें।

कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि किन प्रतिवादियों ने अलख पांडे के व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग या उससे कमाई की, किन मामलों में सामग्री पहली नजर में अश्लील या यौन रूप से आपत्तिजनक है और किन मामलों में सामग्री मानहानिकारक या अपमानजनक है, जिन पर व्यक्तित्व अधिकारों के बजाय अन्य कानूनी उपाय लागू हो सकते हैं।

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट जे. साई दीपक ने अदालत को बताया कि अलख पांडे देश के प्रमुख शिक्षाविदों में से एक हैं।

उन्होंने विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के साथ कई स्तरों पर काम किया। उनके देशभर में 300 से अधिक शिक्षण केंद्र हैं और उन्होंने कई प्रमुख हस्तियों के साथ भी सहयोग किया।

उन्होंने कहा कि अलख पांडे के इंस्टाग्राम पर 31 लाख से अधिक और यूट्यूब पर 1.4 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। उनके जीवन पर आधारित एक श्रृंखला भी प्रमुख ओटीटी मंचों पर उपलब्ध है।

सीनियर एडवोकेट ने कहा कि उनका प्रसिद्ध संबोधन "हेलो बच्चो", उनकी आवाज और चेहरा उनकी विशिष्ट पहचान बन चुके हैं और इन्हें कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया पर सैकड़ों ऐसे पेज चलाए जा रहे हैं, जो अलख पांडे की पहचान का उपयोग कर छूट और अन्य व्यावसायिक प्रचार कर रहे हैं।

इसके अलावा, उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार तस्वीरें, स्टिकर और चलित चित्र बनाए जा रहे हैं तथा मानहानिकारक और अश्लील सामग्री भी प्रसारित की जा रही है।

अधिवक्ता ने कहा कि इस तरह की सामग्री से छात्रों के बीच एक शिक्षक के रूप में अलख पांडे की छवि प्रभावित होने की वास्तविक आशंका है।

गूगल की ओर से पेश वकील ने कहा कि संबंधित यूजर्स की मूल सदस्यता संबंधी जानकारी अलख पांडे को उपलब्ध कराई जा सकती है ताकि संबंधित पक्ष अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि व्यंग्य या पैरोडी से जुड़ी सामग्री पर व्यक्तित्व अधिकारों के मुकदमे में राहत नहीं दी जा सकती और उसके लिए अलग कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिका में व्यक्तित्व अधिकारों के दायरे में कई प्रकार की राहतें मांगी गई, जिनमें ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, मानहानि और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा,

"फिलहाल मैं उन प्रतिवादियों के खिलाफ अंतरिम एकपक्षीय आदेश पारित करने पर विचार कर सकता हूं, जो आपके नाम और पहचान का उपयोग कर व्यावसायिक लाभ कमा रहे हैं।"

इस पर सीनियर एडवोकेट जे. साई दीपक ने स्पष्ट किया कि यह मुकदमा आलोचना या हास्यपूर्ण मीम के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि राहत केवल उन मामलों में मांगी गई, जहां अलख पांडे के व्यक्तित्व का व्यावसायिक शोषण किया जा रहा है या उनके बारे में अश्लील तथा मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह केवल प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि पर्सनालिटी राइट्स का मामला है और अलख पांडे की विशिष्ट सार्वजनिक पहचान को संरक्षण मिलना चाहिए।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि याचिका में कहीं भी सामान्य आलोचना के प्रति असहिष्णुता नहीं दिखाई गई।

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए निर्धारित की।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोर्ट इससे पहले कई प्रसिद्ध व्यक्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों की भी सुरक्षा कर चुका है। इनमें क्रिकेटर अभिषेक शर्मा, युवराज सिंह, कांग्रेस नेता शशि थरूर, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, उद्योगपति अमन गुप्ता, अभिनेता अल्लू अर्जुन, मोहनलाल, काजोल, आर. माधवन, एनटीआर जूनियर, आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता अनिरुद्धाचार्य, गायक जुबिन नौटियाल, पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर, पत्रकार सुधीर चौधरी, पॉडकास्टर राज शमानी तथा अन्य कई सार्वजनिक हस्तियां शामिल हैं।

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