यूपी से जुड़े पासपोर्ट विवाद को सिर्फ़ इसलिए दिल्ली में दायर नहीं किया जा सकता, क्योंकि विदेश मंत्रालय यहाँ स्थित है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट से जुड़ा कोई विवाद सिर्फ़ इसलिए उसके सामने नहीं लाया जा सकता, क्योंकि विदेश मंत्रालय (MEA) राष्ट्रीय राजधानी में स्थित है। [2026 LiveLaw (Del) 645]
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) इस बात पर निर्भर करता है कि क्या विवाद का कोई हिस्सा कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में उत्पन्न हुआ।
इस तरह बेंच ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज की, जिसमें पासपोर्ट में जन्म तिथि को ठीक करने और "उत्प्रवास जांच आवश्यक" (ECR) स्टेटस को हटाने की मांग की गई।
कोर्ट ने पाया कि विवाद से जुड़े सभी तथ्य उत्तर प्रदेश में उत्पन्न हुए, न कि दिल्ली में।
कोर्ट ने कहा,
"सिर्फ़ यह तथ्य कि विदेश मंत्रालय का कार्यालय दिल्ली में स्थित है, इस कोर्ट को वर्तमान याचिका पर सुनवाई करने का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं देता है।"
याचिकाकर्ता ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO), गाजियाबाद द्वारा 4 अगस्त, 2025 को जारी उस सूचना को चुनौती दी, जिसमें पासपोर्ट में दर्ज जन्म तिथि को ठीक करने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों से पासपोर्ट से ECR स्टेटस हटाने का निर्देश देने की भी मांग की।
याचिकाकर्ता के अनुसार, उनका जन्म 9 नवंबर, 2003 को आगरा के एक मेडिकल सेंटर में हुआ था। हालांकि, आगरा नगर निगम द्वारा जारी उनके जन्म प्रमाण पत्र में गलती से जन्म तिथि 9 सितंबर, 2003 दर्ज हो गई। इस गलती को अक्टूबर 2006 में ठीक कर दिया गया, लेकिन 2011 में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय उनके माता-पिता ने अनजाने में पुराना जन्म प्रमाण पत्र जमा कर दिया। नतीजतन, गलत जन्म तिथि उनके पासपोर्ट में बनी रही, जिसमें 2016 और 2021 में बाद के नवीनीकरण (रिन्यूअल) भी शामिल थे।
बालीग होने के बाद याचिकाकर्ता ने सही जन्म तिथि वाले जन्म प्रमाण पत्र के साथ-साथ अपने आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड और कक्षा 10 की मार्कशीट के आधार पर गलती को ठीक करने की मांग की; इन सभी दस्तावेजों में उनकी सही जन्म तिथि दर्ज थी। हालांकि, RPO ने सुधार करने से इनकार किया। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि कोर्ट के पास क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) है, क्योंकि MEA (विदेश मंत्रालय), जिसका RPO (क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय) पर प्रशासनिक नियंत्रण है, दिल्ली में स्थित है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सभी संबंधित अधिकारी और दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश में थे और मामले का कोई भी हिस्सा दिल्ली में नहीं हुआ।
केंद्र की आपत्ति को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र आगरा में जारी और ठीक किया गया, पासपोर्ट गाजियाबाद में RPO द्वारा जारी और नवीनीकृत किया गया और संबंधित पत्र-व्यवहार भी गाजियाबाद से ही हुआ था। याचिकाकर्ता खुद उत्तर प्रदेश का निवासी था।
इसमें 'कुसुम इंगॉट्स एंड अलॉयज़ लिमिटेड बनाम भारत संघ (2004)' मामले का हवाला दिया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल केंद्र सरकार या संबंधित अधिकारी का मुख्यालय किसी खास जगह पर होने से ही हाई कोर्ट को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं मिल जाता।
इसलिए कोर्ट ने रिट याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को उचित फोरम (अदालत या प्राधिकरण) में जाने की छूट दी।
Case Title: Chintan Agrawal v. Union of India & Ors.