Facebook Marketplace पर वॉकी-टॉकी की कथित अवैध बिक्री पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाने वाले आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची Meta

Update: 2026-03-18 10:41 GMT

Meta Platforms ने बुधवार को Central Consumer Protection Authority (CCPA) के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। इस आदेश में Facebook Marketplace पर वॉकी-टॉकी की कथित अनाधिकृत बिक्री और लिस्टिंग पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया गया था।

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कोरव ने Meta से पूछा कि वे यह स्पष्ट करें कि इस विवादित फैसले को अधिकार क्षेत्र से बाहर कैसे कहा जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख तय की।

बता दें, जनवरी में CCPA ने उपभोक्ता संरक्षण और दूरसंचार नियमों के उल्लंघन के मामले में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर "बड़े पैमाने पर वॉकी-टॉकी की अवैध लिस्टिंग और बिक्री" का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया था।

Amazon, Flipkart, Meesho, JioMart, Meta (Facebook Marketplace), Talk Pro, Chimiya, MaskMan Toys, India Mart, TradeIndia, Antriksh Technologies, Vardaanmart और Krishna Mart सहित 13 ई-कॉमर्स संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए थे।

Meta Platforms की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि इस विवादित आदेश के दूरगामी परिणाम होंगे और Meta का काम करने का तरीका Amazon और Flipkart से बिल्कुल अलग है।

उन्होंने कहा कि Amazon और Flipkart के विपरीत Meta (Facebook) कोई ई-मार्केट नहीं है, बल्कि यह केवल एक "नोटिस बोर्ड" है। उन्होंने कहा कि Facebook न तो खरीद-बिक्री के लिए कोई तंत्र (Mechanism) उपलब्ध कराता है, और न ही वह उपयोगकर्ताओं से कोई कमीशन लेता है, क्योंकि यह कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म नहीं है।

उन्होंने कहा,

"हम कोई वर्चुअल 'खान मार्केट' उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। यह एक नोटिस बोर्ड है, जो केवल Facebook यूजर्स के लिए है। हम कोई दुकान नहीं हैं। यहां किसी भी तरह की व्यावसायिक बिक्री की अनुमति नहीं है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। हम किसी से भी कोई पैसा नहीं लेते हैं।"

इसके बाद जस्टिस कोरव ने रोहतगी से पूछा कि इस मुद्दे पर नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेडर्सल कमीशन (NCDRC) द्वारा विचार क्यों नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने रोहतगी से यह भी कहा कि वे सुनवाई की अगली तारीख पर अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से जुड़े पहलू पर अदालत को संतुष्ट करें।

Meta का पक्ष यह है कि Facebook Marketplace एक "मुफ्त सेवा" है, जिसे आम लोगों (Natural Persons) के लिए व्यक्तिगत क्षमता में सामान बेचने या बदलने के उद्देश्य से तैयार किया गया; इसमें व्यवसायों और व्यावसायिक विक्रेताओं को अपनी लिस्टिंग बनाने की अनुमति नहीं है।

Title: Meta Platforms v. Union of India & Ors

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