दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) के चल रहे चुनावों में छात्र संगठनों, उम्मीदवारों या किसी और के द्वारा जीत का जुलूस निकालने पर रोक लगाई।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सभी छात्र संगठनों और उनके उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न उन पर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और समय-समय पर जारी अदालती आदेशों के उल्लंघन के लिए भारी चुनावी जुर्माना लगाया जाए।

जब कोर्ट को बताया गया कि वोटिंग चल रही है और नतीजे कल (शनिवार) आएंगे, तो कोर्ट ने कहा:

"इस कोर्ट ने पहले के आदेशों में जो अनुभव देखा है, उसे देखते हुए हम निर्देश देते हैं कि कल नतीजे घोषित होने के बाद या उसके बाद भी उम्मीदवार, छात्र या कोई और जीत का जुलूस नहीं निकालेगा - न केवल दिल्ली की सड़कों पर, बल्कि कैंपस और हॉस्टल के अंदर भी।"

कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई भी जीत की रैली न हो, यह सुनिश्चित करना दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी होगी। साथ ही यह भी साफ किया कि किसी भी उल्लंघन पर न केवल आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई होगी, बल्कि इसे कोर्ट की अवमानना ​​भी माना जाएगा।

सुनवाई के दौरान, ASG चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि कुल 998 चालान जारी किए गए, 30 कारें ज़ब्त की गईं, एक छात्र को कॉलेज से निकाला गया, छह FIR दर्ज की गईं और चार छात्रों को गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि खराब हालत वाली कारों और बिना लाइसेंस के पाई गई कारों के लिए अब तक 5737 चालान जारी किए गए।

ABVP और NSUI जैसे कुछ छात्र संगठनों की ओर से पेश वकीलों से बात करते हुए कोर्ट ने कहा:

"क्या आप छात्र हैं? आप यूनिवर्सिटी अधिकारियों द्वारा बुलाई गई बैठक में हिस्सा लेते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि चुनाव लिंगदोह रिपोर्ट का उल्लंघन किए बिना हों। देखिए आपने क्या किया... हम इन सभी उल्लंघनों के लिए सभी छात्र संगठनों पर सामूहिक जुर्माना लगाएंगे। आप लोगों ने अपना तरीका नहीं बदला है। पिछले चुनावों के दौरान दिए गए आदेशों को देखिए।"

बेंच ने उस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें पिछले साल चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार ने कॉलेज के प्रोफेसर को थप्पड़ मारा था।

चीफ जस्टिस ने कहा,

“इससे ज़्यादा चिंता की बात और क्या हो सकती है? हमारे देश की राजधानी में... पिछले साल कोर्ट की नरमी की वजह से ही चुनाव जीतने के बाद एक उम्मीदवार ने टीचर को थप्पड़ मारा था। क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं?”

कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस की ओर से शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को उसके तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाए।

कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का बार-बार और खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और इस स्थिति को हर हाल में रोकना ज़रूरी है।

कोर्ट ने कहा,

“हम नियमों का उल्लंघन करने वाले सिर्फ़ अलग-अलग छात्रों पर ही नहीं, बल्कि छात्र संगठनों पर भी सामूहिक चुनावी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखते हैं। छात्र संगठनों और चुनाव लड़ रहे सभी 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया जाए।”

यह बात कोर्ट की ओर से कल DUSU चुनावों के दौरान हुई हिंसा को रोकने में नाकाम रहने पर अधिकारियों को फटकार लगाने और यह कहने के बाद कही गई कि लोकतंत्र को “आपराधिक समाज” में बदलने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने कहा कि देश में स्टूडेंट यूनियन या कॉलेज चुनावों के दौरान उम्मीदवारों, छात्रों या बाहरी लोगों द्वारा हिंसा और गलत व्यवहार का इस्तेमाल समाज के सभी ज़िम्मेदार वर्गों के लिए चिंता का विषय रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है।

कोर्ट ने यह आदेश वकील प्रशांत मनचंदा की एक नई अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए दिया। मनचंदा ने 2017 में एक याचिका दायर की, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। याचिका में नुकसान को ठीक करने और उन जगहों की मरम्मत करने की भी मांग की गई।

मनचंदा ने इस नई अर्ज़ी का ज़िक्र करते हुए कहा कि कल भी उम्मीदवारों ने तोड़-फोड़ की, जो लिंगदोह कमेटी के नियमों और समय-समय पर दिए गए अदालती आदेशों का उल्लंघन है।

लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में कहा गया है कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र चुनाव राजनीतिक दलों के प्रभाव से मुक्त होने चाहिए।

मनचंदा ने उन दिशानिर्देशों और तय उपायों के उल्लंघन पर चिंता जताई, जो DUSU चुनाव को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए बनाए गए।

गुरुवार को कोर्ट ने साफ़ किया कि किसी राजनीतिक दल की छात्र शाखा का सदस्य होने के नाते कोई छात्र DUSU चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक दखलंदाज़ी के खिलाफ चेतावनी दी और DU अधिकारियों व मुख्य चुनाव अधिकारी से इसे रोकने को कहा।

पिछले साल भी चीफ जस्टिस उपाध्याय ने साफ़ किया था कि चुनाव व्यवस्थित तरीके से होने चाहिए, जिसमें संपत्ति को नुकसान न पहुँचाया जाए और न ही गैर-कानूनी तरीके से गाड़ियां चलाई जाएं।

बेंच ने यह भी कहा था कि छात्र यूनियन चुनावों के दौरान छात्र कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते।

Title: Prashant Manchanda v. Union of India & Ors

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