FCRA Case : दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को CHRI को 20 लाख रुपये निकालने की अनुमति वाले आदेश को वापस लेने की अर्जी देने की छूट दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को गैर-सरकारी संगठन कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) को अपने आरक्षित घरेलू कोष से 20 लाख रुपये निकालने की अनुमति देने वाले अंतरिम आदेश को वापस लेने के लिए एकल जस्टिस के समक्ष आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने केंद्र को यह आवेदन एक सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ CHRI की उस याचिका से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA के तहत उसके पंजीकरण प्रमाणपत्र को रद्द किए जाने को चुनौती दी गई।
केंद्र सरकार ने एकल जस्टिस के 19 मई के आदेश को चुनौती दी। उस आदेश में CHRI को अपने आरक्षित कोष से 20 लाख रुपये जारी करने की अनुमति दी गई। सिंगल जज ने कहा था कि संगठन अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक विभिन्न नियमित खर्चों में इस राशि का इस्तेमाल कर सकता है।
केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि 19 मई का आदेश केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए बिना आवेदन का निपटारा करते हुए पारित किया गया। उनका कहना था कि इससे केंद्र को अपनी आपत्तियां दाखिल करने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भले ही मौखिक दलीलें रखने की अनुमति दी गई, लेकिन केंद्र को आवेदन पर लिखित आपत्तियां दाखिल करने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
वहीं, CHRI की ओर से सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि आदेश पारित होने के बाद केंद्र सरकार ने उसे वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल किया, जिस पर 19 जुलाई को सुनवाई हुई। उन्होंने बताया कि केंद्र को वह आवेदन वापस लेने की अनुमति दी गई और 19 मई के आदेश को वापस लेने समेत उचित आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि उसे इन दलीलों के गुण-दोष में जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि 19 मई का आदेश अंतरिम प्रकृति का है और केंद्र सरकार सिंगल जज के समक्ष इसे वापस लेने की मांग कर सकती है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र की अपील का निपटारा करते हुए उसे एक सप्ताह के भीतर सिंगल जज के समक्ष आदेश वापस लेने की अर्जी दाखिल करने की स्वतंत्रता दी। कोर्ट ने कहा कि इस आवेदन पर जवाब भी उसके बाद एक सप्ताह के भीतर दाखिल किए जाएं।
कोर्ट को बताया गया कि CHRI की मूल याचिका में सिंगल जज के समक्ष सभी पक्षों की दलीलें और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा याचिका 30 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
खंडपीठ ने सिंगल जज से अनुरोध किया कि CHRI की रिट याचिका और केंद्र की ओर से दाखिल की जाने वाली आदेश वापस लेने की अर्जी, दोनों की सुनवाई में तेजी लाई जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि 30 सितंबर को रिट याचिका पर अंतिम सुनवाई संभव नहीं हो तो कम से कम आदेश वापस लेने की अर्जी पर सुनवाई पूरी करने का प्रयास किया जाए।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पक्षकार सिंगल जज के समक्ष लंबित अन्य अंतरिम आवेदनों पर भी अपनी दलीलें रख सकते हैं। उसने कहा कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियों को पक्षकारों के दावों के गुण-दोष पर हाईकोर्ट की राय नहीं माना जाएगा।
खंडपीठ ने आगे कहा कि सभी मुद्दे और सभी आधार पक्षकारों के लिए खुले रहेंगे, जिसमें रिट याचिका की सुनवाई योग्य होने का सवाल भी शामिल है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील का निपटारा किया।