सरकारी स्कूलों में ₹50,000 का फ़र्नीचर दान करें: समझौते के बाद मारपीट की FIR रद्द करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का आरोपियों को निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच लोगों के खिलाफ़ दर्ज FIR रद्द की। इन लोगों पर गैर-इरादतन हत्या की कोशिश और सरकारी कर्मचारी पर हमले जैसे आरोप थे, लेकिन पक्षों ने आपसी सहमति से अपना विवाद सुलझा लिया। [2026 LiveLaw (Del) 862]
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने उन्हें निर्देश दिया कि वे अपने घर के पास के सरकारी स्कूलों में कुल ₹50,000 का फ़र्नीचर दान करें (यानी हर आरोपी ₹10,000 का फ़र्नीचर दान करे)।
कोर्ट ने सुभाष प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR रद्द की। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धाराओं 323 (चोट पहुँचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 186 (सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना), 332 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुँचाना), 353 (हमला), 308 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश), 506 (आपराधिक धमकी) और 34 (साझा इरादा) के तहत दर्ज की गई थी।
कोर्ट को बताया गया कि शिकायतकर्ता ने पक्षों के बीच गलतफहमी के कारण FIR दर्ज कराई थी।
यह भी बताया गया कि बाद में पक्षों ने 11 अगस्त को एक समझौतानामा किया, जिसके तहत शिकायतकर्ता ने कहा कि वह आरोपियों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं चाहता।
शिकायतकर्ता ने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि उसका फ़ैसला स्वेच्छा से लिया गया और यह किसी दबाव या ज़बरदस्ती का नतीजा नहीं था। समझौते को देखते हुए राज्य सरकार ने FIR रद्द करने का विरोध नहीं किया।
इस बीच याचिकाकर्ताओं ने कम्युनिटी सर्विस करने या किसी सरकारी स्कूल को इंफ्रास्ट्रक्चर में मदद करने की इच्छा जताई।
विवाद की प्रकृति, पक्षों के बीच समझौते और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए जस्टिस कौरव ने FIR और आरोपियों के खिलाफ़ सभी संबंधित कार्यवाही रद्द की।
हालांकि, कोर्ट ने पांचों याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने इलाके के पास स्थित सरकारी स्कूलों में कुल ₹50,000 का फ़र्नीचर दान करें।
कोर्ट ने पक्षों को अपने समझौते की शर्तों का पालन करने का भी निर्देश दिया।
Title: KUSHAGRA DUA & ORS v. THE STATE OF NCT OF DELHI AND ANR