युवराज सिंह के पर्सनलिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश- AI से बने डीपफेक हटाए जाएं
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पर्सनलिटी राइट्स को बचाते हुए उनके नाम, तस्वीर, आवाज और अन्य पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करने पर अंतरिम रोक लगाई। कोर्ट ने AI तकनीक के जरिए तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और तस्वीरों को हटाने का भी आदेश दिया।
जस्टिस ज्योति सिंह ने माना कि प्रथम दृष्टया युवराज सिंह का पक्ष मजबूत है। यदि उन्हें तत्काल संरक्षण नहीं दिया गया तो उनकी प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित किया।
कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों, जिनमें अज्ञात व्यक्तियों को भी शामिल किया गया, को निर्देश दिया कि वे युवराज सिंह के नाम, तस्वीर, आवाज, चेहरे, व्यक्तित्व या उनसे जुड़ी किसी भी पहचान का उनकी अनुमति के बिना व्यक्तिगत या व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह रोक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनरेटिव Ai, मशीन लर्निंग, डीपफेक, Ai चैटबॉट, फेस मॉर्फिंग और फेस स्वैपिंग जैसी तकनीकों से तैयार की गई सामग्री पर भी लागू होगी। साथ ही युवराज सिंह को दिखाने वाले किसी भी Ai-जनित या छेड़छाड़ किए गए ऑडियो-वीडियो के निर्माण और प्रसार पर भी रोक लगा दी गई।
याचिका में कहा गया कि कई सोशल मीडिया खातों ने एआई की मदद से युवराज सिंह की फर्जी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए। इनमें एक तस्वीर में उन्हें स्वर्ण मंदिर में बिना सिर ढके खड़े हुए दिखाया गया, जबकि एक अन्य तस्वीर में एक साथी क्रिकेटर को उनके पैर छूते हुए दर्शाया गया। कुछ पोस्ट में उन्हें हिंसक और अपमानजनक व्यवहार करते हुए दिखाया गया। इसके अलावा एक पोस्ट में उनके नाम से महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक विचार भी गलत तरीके से जोड़े गए।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ विक्रेता युवराज सिंह की अनुमति के बिना उनके नाम और तस्वीर वाले टी-शर्ट, फोटो फ्रेम और स्टिकर बेच रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को यह भ्रम हो रहा है कि इन उत्पादों का समर्थन स्वयं युवराज सिंह ने किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों को भारतीय न्यायालय लगातार मान्यता और संरक्षण देते रहे हैं। किसी भी व्यक्ति के नाम, तस्वीर, आवाज या अन्य पहचान का उसकी सहमति के बिना उपयोग करने का अधिकार किसी तीसरे पक्ष को नहीं है।
कोर्ट ने कहा,
"युवराज सिंह जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को अपने व्यक्तित्व और उससे जुड़े सभी गुणों पर विशेष अधिकार प्राप्त हैं। उन्हें व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने का अधिकार केवल उन्हीं के पास है और वे किसी भी अनधिकृत उपयोग या शोषण से उनकी रक्षा करने के हकदार हैं।"
कोर्ट ने यह भी माना कि AI से तैयार किए गए फर्जी वीडियो और पोस्ट वर्षों की मेहनत से अर्जित युवराज सिंह की प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, उनकी अनुमति के बिना उनके नाम और तस्वीर वाले उत्पाद बेचना उनके व्यक्तित्व अधिकारों के व्यावसायिक मूल्य को भी कम करता है।
जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा,
"व्यक्तित्व और निजता के अधिकारों का उल्लंघन करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए।"
हाईकोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया कि वह आदेश में चिन्हित यूआरएल को 36 घंटे के भीतर हटाए। इसके अलावा अमेजन और फ्लिपकार्ट को संबंधित उत्पादों की सूची हटाने का आदेश दिया गया। दो अन्य विक्रेताओं को भी 24 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में युवराज सिंह के नाम या व्यक्तित्व का इस तरह का कोई और अनधिकृत इस्तेमाल सामने आता है, तो उन्हें संबंधित मंच के समक्ष शिकायत करने या अन्य कानूनी उपाय अपनाने की पूरी स्वतंत्रता होगी।