बाल यौन शोषण मामले में पीड़ित की प्राइवेसी का उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट ने TV Today पर लगा ₹5 लाख का मुआवज़ा सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को TV Today Network Limited के खिलाफ़ ₹5 लाख का मुआवज़ा देने वाले सिंगल जज के आदेश को सही ठहराया। कोर्ट ने माना कि चैनल ने बच्चे के साथ यौन शोषण के मामले में पीड़ित की पहचान ज़ाहिर करने वाली जानकारी प्रसारित करके उसकी प्राइवेसी और गोपनीयता के अधिकारों का उल्लंघन किया। [2026 LiveLaw (Del) 602]
जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने TV Today की अपील खारिज की, जो उसने फरवरी 2013 के सिंगल जज के फैसले के खिलाफ़ दायर की थी। उस फैसले में पीड़ित और उसकी माँ को मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया।
यह मामला तब शुरू हुआ, जब एक नाबालिग लड़की ने अपने पिता पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित की माँ के मीडिया से बात करने से इनकार करने के बावजूद, TV Today ने अपने 'आज तक' चैनल पर रिपोर्ट प्रसारित की। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर पिता की पहचान, पद, कार्यस्थल की जानकारी, रिहायशी इलाके के दृश्य और अन्य विवरण दिखाए गए, जिनसे पीड़ित बच्चे की पहचान हो सकती थी।
बेंच ने गौर किया कि नाबालिग की माँ ने अपनी रिट याचिका में कहा कि अपीलकर्ता द्वारा 'आज तक' कार्यक्रम में प्रसारण के कारण नाबालिग की प्राइवेसी और गोपनीयता के अधिकार का गंभीर और अपूरणीय उल्लंघन हुआ।
इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपों को सही माना जाए तो यह साफ़ तौर पर TV Today द्वारा समाचार प्रसारित करने के अपने सार्वजनिक कार्य का "अनुचित और गैर-कानूनी निर्वहन" होगा।
कोर्ट ने कहा,
"इसलिए रिट याचिका में माँगी गई राहत का मकसद साफ़ तौर पर यह सुनिश्चित करना था कि अपीलकर्ता देश तक समाचार पहुँचाने के अपने सार्वजनिक कार्य को करते समय उस पर निहित सार्वजनिक कर्तव्य का उचित रूप से पालन करे।"
माँ की याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए कोर्ट ने सिंगल जज की इस राय का समर्थन किया कि TV Today का यह कृत्य—जिसमें माँ के घर जाने की जानकारी, घर की लोकेशन, पिता का नाम, आधिकारिक पद और आधिकारिक पता, और नाबालिग की आवाज़ प्रसारित की गई—"अश्लील या रुग्ण जिज्ञासा का प्रदर्शन" था।
बेंच ने कहा,
"एक प्रतिष्ठित टीवी चैनल होने का दावा करने वाले संस्थान से ऐसे रवैये की उम्मीद नहीं की जाती। साथ ही यह मौलिक अधिकारों और उनके अर्थ व निहितार्थों को समझने में भारी कमी को भी दर्शाता है।"
इसके अलावा, बेंच ने गौर किया कि चूंकि मां ने न्यूज़ चैनल की टीम से बात करने से साफ इनकार कर दिया, इसलिए टीवी टुडे के पास एकमात्र रास्ता यही था कि वे पीछे हट जाते और नाबालिग के साथ हुई घटना का कोई भी ज़िक्र प्रसारित करने का विचार छोड़ देते।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि न्यूज़ चैनल ने नाबालिग की इच्छाओं की पूरी तरह अनदेखी करते हुए अपना कार्यक्रम प्रसारित कर दिया।
कोर्ट ने कहा,
"इसलिए हम सिंगल जज की इस राय से सहमत हैं कि अपने 'आज तक' चैनल पर नुकसानदेह कार्यक्रम प्रसारित करके, अपीलकर्ता ने 'X' के निजता के अधिकार का खुलेआम उल्लंघन किया।"
निजता के अधिकार के अस्तित्व पर ज़ोर देते हुए बेंच ने कहा कि भले ही यह मान लिया जाए कि किसी चरण में या किसी कार्यवाही के दौरान मां ने नाबालिग की पहचान उजागर की थी तो भी इससे बाकी दुनिया को वैसा ही करने की खुली छूट नहीं मिल जाती।
कोर्ट ने कहा,
"कोई नागरिक अपनी निजता के अधिकार को किस हद तक लागू करना चाहता है, यह पूरी तरह से उसी नागरिक का अधिकार है। इस संबंध में नागरिक के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। हाल की एक हिंदी फिल्म के एक मशहूर कलाकार के प्रसिद्ध संवाद को दोहराते हुए कहें तो, 'ना का मतलब ना होता है'।"
Title: TV TODAY NETWORK LIMITED v. ABC & ORS