सिर्फ़ पति की इनकम के आधार पर पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता नहीं दिया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि फ़ैमिली कोर्ट सिर्फ़ पति की इनकम को ध्यान में रखकर पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता नहीं दे सकता, बल्कि राहत देने के लिए ज़रूरी दूसरे पहलुओं पर भी विचार करना होगा।
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि भले ही पति अच्छी-खासी इनकम वाला व्यक्ति हो, लेकिन अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देते समय फ़ैमिली कोर्ट उन सभी ज़रूरी बातों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, जिन पर विचार किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्षों के अधिकारों और ज़िम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है। साथ ही CrPC की धारा 125 के मुख्य मकसद को भी ध्यान में रखना होगा, जिसे न तो दरकिनार किया जा सकता है और न ही अनदेखा।
ये बातें तब कही गईं, जब फ़ैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए अंतरिम गुज़ारा-भत्ते को 30,000 रुपये प्रति माह से घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया।
पति ने फ़ैमिली कोर्ट के जून 2024 के उस आदेश को चुनौती देते हुए रिविज़न याचिका दायर की, जिसमें उसे गुज़ारा-भत्ते की अर्ज़ी दायर करने की तारीख़ से पत्नी को 30,000 रुपये प्रति माह देने का निर्देश दिया गया।
दोनों की शादी 1995 में हुई थी और उनके दो बच्चे थे। पत्नी ने 2021 में गुज़ारा-भत्ते की मांग की। फ़ैमिली कोर्ट ने शुरू में जनवरी 2022 में उसे 25,000 रुपये का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया।
हाईकोर्ट में पति ने तर्क दिया कि वह दोनों बच्चों का आर्थिक और शैक्षणिक खर्च उठा रहा है, जिसमें बड़ी बेटी भी शामिल है जो MBBS की पढ़ाई कर रही है।
उसने यह भी बताया कि उसकी पत्नी MBA (फ़ाइनेंस) ग्रेजुएट है, उसे किराए और ब्याज से इनकम होती है और वह उसके द्वारा खरीदे गए घर में रह रही है। उसने अपने बकाया लोन और देनदारियों का भी ज़िक्र किया।
दूसरी ओर, पत्नी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि फ़ैमिली कोर्ट ने पति के इनकम एफ़िडेविट और इनकम टैक्स रिटर्न पर विचार किया, जिसमें संबंधित असेसमेंट ईयर के लिए उसकी इनकम 63 लाख रुपये से ज़्यादा दिखाई गई। उसने यह भी बताया कि वह कार्गो का बिज़नेस चला रहा है।
पति को राहत देते हुए जस्टिस बनर्जी ने कहा कि हालांकि फैमिली कोर्ट ने मामले से जुड़ी दूसरी बातों पर ठीक से ध्यान दिया, लेकिन विवादित आदेश देते समय उन्हें उतना महत्व नहीं दिया और "सिर्फ पति की इनकम" पर ही ध्यान केंद्रित किया।
कोर्ट ने देखा कि दोनों बच्चे पति के साथ रह रहे है और वह अकेले ही उनकी पढ़ाई-लिखाई और आर्थिक खर्च उठा रहा है।
कोर्ट ने यह भी देखा कि पत्नी काफी समय से एक ऐसे घर में रह रही है, जिसे पति ने ही खरीदा था और जो उसी का है।
कोर्ट ने पत्नी की योग्यता पर भी ध्यान दिया—उसके पास MBA (फाइनेंस) की डिग्री के साथ-साथ ज्योतिष में अन्य डिग्री और डिप्लोमा भी है और वह खुद कमाने में सक्षम है।
कोर्ट ने यह भी देखा कि उसे हर महीने 10,450 रुपये का किराया और फिक्स्ड डिपॉजिट से लगभग 4,400 रुपये का ब्याज मिल रहा है।
विवादित आदेश में दखल देने की ज़रूरत को देखते हुए कोर्ट ने अंतरिम गुजारा भत्ता 30,000 रुपये से घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि यह कम की गई रकम 12 अप्रैल, 2021 (गुजारा भत्ता की अर्जी दाखिल करने की तारीख) से लागू होगी।
Title: X v. Y