केंद्र सरकार के पास पूरा प्लेटफॉर्म बंद करने का अधिकार, केवल सामग्री हटाने तक सीमित नहीं धारा 69ए: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-06-19 10:56 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग मंच टेलीग्राम की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69ए के तहत केंद्र सरकार के पास केवल किसी विशेष सामग्री को हटाने ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पूरे मध्यस्थ मंच को अस्थायी रूप से अवरुद्ध करने की भी शक्ति है।

जस्टिस तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि अधिनियम में "सूचना" की परिभाषा बहुत व्यापक है, जिसमें कोड, कंप्यूटर प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं। इसलिए किसी अनुप्रयोग या डिजिटल मंच को इस परिभाषा से बाहर नहीं रखा जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट कहा,

"धारा 69ए के तहत अवरोधन की शक्ति केवल व्यक्तिगत सामग्री तक सीमित नहीं है।"

मामला उस समय उत्पन्न हुआ जब NEET पुनर्परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक की आशंकाओं के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने धारा 69ए के तहत आपातकालीन आदेश जारी कर भारत में टेलीग्राम को 22 जून तक अस्थायी रूप से बैन कर दिया।

टेलीग्राम ने अदालत में दावा किया कि उसने NEET से जुड़ी अवैध सामग्री हटाने के लिए सक्रिय कदम उठाए। कंपनी के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों की मदद से कई लिंक और चैनलों पर कार्रवाई की गई।

टेलीग्राम ने यह भी तर्क दिया कि केंद्र सरकार ने बिना उचित विचार-विमर्श के आदेश पारित किया और नामित अधिकारी ने केवल आरोपों को दोहरा दिया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि आपातकालीन अवरोधन आदेश में पर्याप्त कारण दर्ज थे और यह नहीं कहा जा सकता कि अधिकारियों ने बिना विचार किए निर्णय लिया।

अदालत ने पाया कि धारा 69ए और वर्ष 2009 के अवरोधन नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया। साथ ही टेलीग्राम को सुनवाई का अवसर देने के बाद पारित अंतिम आदेश में अवरोधन जारी रखने के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में पहले अंतरिम आदेश जारी किया जा सकता है। उसके बाद संबंधित मंच को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। इसलिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि सभी विस्तृत कारण प्रारंभिक आदेश में ही दर्ज होने चाहिए।

धारा 69ए की व्याख्या करते हुए अदालत ने कहा कि किसी अनुप्रयोग या मंच को सामान्य रूप से एक कंप्यूटर प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर के रूप में समझा जाता है। चूंकि कानून की परिभाषा में सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर प्रोग्राम शामिल हैं, इसलिए पूरे मंच को भी "सूचना" की श्रेणी में माना जा सकता है।

अदालत ने यह भी माना कि इस मामले में पूरे मंच को अस्थायी रूप से अवरुद्ध करना संवैधानिक रूप से "अनुपातिकता" के सिद्धांत के अनुरूप था।

पीठ ने कहा कि सरकार ने पहले कम कठोर उपाय अपनाते हुए कई बार व्यक्तिगत चैनलों और खातों को हटाने के निर्देश दिए। लेकिन रिकॉर्ड से पता चला कि संबंधित समूह नए नामों, समानांतर चैनलों, स्वचालित खातों और बदले हुए परिचयों के माध्यम से बार-बार वापस आ रहे थे, जिससे केवल चैनल-विशिष्ट कार्रवाई प्रभावी नहीं रही।

हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि NEET पुनर्परीक्षा में लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना थी। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए केंद्र सरकार की कार्रवाई उचित और न्यायसंगत थी।

इन्हीं कारणों से अदालत ने टेलीग्राम की याचिका खारिज की और केंद्र सरकार के अवरोधन आदेश को वैध ठहराया।

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