दिल्ली दंगे: IB कर्मचारी की हत्या में उम्रकैद के खिलाफ ताहिर हुसैन हाईकोर्ट पहुंचे
आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
बता दें कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह की अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 31 जुलाई को ताहिर हुसैन, जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की।
सजा सुनाते हुए निचली अदालत ने कहा था कि अपराध उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान किया गया और जिस तरह से हत्या को अंजाम दिया गया, वह बेहद क्रूर था। अदालत के अनुसार, अपराध धर्म के आधार पर किया गया।
अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा के शव को जानवर की तरह घसीटकर चांदबाग पुलिया तक ले जाया गया और इसके बाद नाले में फेंक दिया गया। अदालत ने इस घटना में की गई बर्बरता को बेहद भयावह बताया था।
हालांकि मौत की सजा की मांग पर अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस तथ्य रिकॉर्ड पर नहीं ला सका जिससे यह साबित हो कि पांचों दोषियों में पहले से कोई हिंसक प्रवृत्ति या इस तरह के अपराध की प्रवृत्ति थी।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपियों का पहले किसी आपराधिक मामले में शामिल होने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया।
निचली अदालत ने कहा था कि मौत की सजा देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है लेकिन ऐसे मामले में केवल गैरकानूनी जमावड़े से आगे कुछ ऐसा साबित होना चाहिए, जो किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त करने जैसी अत्यंत कठोर सजा को उचित ठहराए।
मामले की FIR अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दर्ज की गई थी। दंगों के दौरान अंकित के लापता होने के बाद उनके पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में अंकित का शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ। GTB अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार घटना वाले दिन अंकित शर्मा शाम करीब पांच बजे घर से किराने का सामान और घरेलू जरूरत की चीजें खरीदने के लिए निकले थे। कई घंटे बीत जाने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटे तो परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। बाद में उनका शव नाले में मिला।
अंकित के शरीर पर सिर, चेहरे, सीने, पीठ और कमर पर धारदार हथियारों और अन्य चोटों के निशान पाए गए थे। शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुल 51 चोटों का उल्लेख किया गया। इनमें धारदार हथियार और किसी भारी या कुंद वस्तु से लगी चोटें शामिल थीं।
अंकित के पिता ने FIR में ताहिर हुसैन और उसके साथियों पर अपने बेटे की हत्या किए जाने का संदेह जताया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया।
मार्च 2023 में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन, हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम के खिलाफ आरोप तय किए।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147, 148, 153ए, 302, 365, 120बी, 149, 188 और 153ए के तहत आरोप तय किए गए। ताहिर हुसैन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 505, 109 और 114 के तहत अतिरिक्त आरोप भी लगाए गए। आरोपी नाजिम पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भी अतिरिक्त आरोप लगाया गया।
अब ताहिर हुसैन ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी। उनकी अपील में निचली अदालत के फैसले की वैधता और मामले में उनके खिलाफ दर्ज निष्कर्षों को चुनौती दी गई।