दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्दोष लोगों के पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी जानकारियों का दुरुपयोग कर फर्जी GST रजिस्ट्रेशन कराने के आरोपों की जांच में तकनीक के इस्तेमाल की सराहना की। अदालत ने मामले के आरोपी राज कुमार को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने जांच अधिकारी की ओर से दाखिल विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी के साधनों का इस्तेमाल कर कथित जालसाजों तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिक तरीके से जांच की।

अदालत ने कहा,

“जांच अधिकारी ने सूचना प्रौद्योगिकी के साधनों का इस्तेमाल करते हुए तकनीकी जांच का विस्तृत विवरण दिया। ऐसी वैज्ञानिक जांच सराहनीय है।”

मामला बाहरी उत्तर जिला स्थित साइबर थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 419, 468, 471 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया।

अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता को आयकर विभाग से नोटिस मिलने के बाद पता चला कि उसके पैन कार्ड से दो GST फर्म जुड़ी हुई हैं।

शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने कभी GST रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन नहीं किया और न ही उसे इन फर्मों के बारे में कोई जानकारी थी।

आरोप था कि शिकायतकर्ता के पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम पर GST पंजीकरण कराया गया और उसके माध्यम से कथित तौर पर अवैध वित्तीय गतिविधियां की गईं।

जांच के दौरान पुलिस ने उन स्थानों का दौरा किया जहां से संबंधित फर्मों के संचालन का दावा किया गया लेकिन वहां ऐसी कोई फर्म मौजूद नहीं मिली। इसके बाद जांच को तकनीकी माध्यमों से आगे बढ़ाया गया।

जांच अधिकारी ने GST रिटर्न दाखिल करने के लिए प्राप्त किए गए OTP से जुड़े मोबाइल नंबर का पता लगाया। संबंधित ईमेल खातों की जांच की गई और एक जीएसटी नंबर से जुड़े बैंक खाते की भी पड़ताल की गई।

जांच में सामने आया कि एक ईमेल खाता ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ा था जो राज कुमार के नाम पर पंजीकृत था। उसका ईमेल खाता एक अन्य ईमेल खाते में पुनर्प्राप्ति ईमेल के रूप में भी जुड़ा हुआ पाया गया।

अभियोजन का आरोप है कि राज कुमार फर्जी संस्थाओं के GST नंबर तैयार करने और उनसे जुड़े मोबाइल नंबर व ईमेल की जानकारी सह-आरोपी अमन बिष्ट को उपलब्ध कराने में शामिल था।

आरोप है कि बाद में इन फर्जी GST नंबरों का इस्तेमाल फर्जी बिल और ई-वे बिल तैयार करने के लिए किया गया। कथित तौर पर कुछ ग्राहकों ने सीधे राज कुमार को भुगतान भी किया।

राज कुमार की ओर से दलील दी गई कि मामला मुख्य रूप से सह-आरोपी के बयान पर आधारित है और जिन मोबाइल फोन से कथित आपत्तिजनक गतिविधियां की गईं, वे उसके नहीं थे। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए कहा कि कथित धोखाधड़ी से उसे कोई लाभ नहीं मिला।

राज्य की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि सह-आरोपी के बयानों के अलावा पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य भी मौजूद हैं। अभियोजन के अनुसार फर्जी जीएसटी रिटर्न दाखिल करने और OTP प्राप्त करने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर तथा ईमेल खाते आरोपी के नाम से जुड़े पाए गए।

राज्य ने यह भी बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसे घोषित अपराधी घोषित करने की कार्रवाई अंतिम चरण में है।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के संबंध में जांच अभी जारी है और कथित धोखाधड़ी में उसकी भूमिका तथा उसके पूरे दायरे का पता लगाया जाना बाकी है।

अदालत ने फर्जी GST रिटर्न दाखिल करने को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि निर्दोष लोगों के पैन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी जानकारियों का दुरुपयोग करने से केवल संबंधित व्यक्तियों को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि जांच जारी होने, आरोपी के कथित असहयोग और जांच अधिकारी द्वारा हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता बताए जाने को देखते हुए यह अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।

अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े तीन अन्य मामले भी दर्ज हैं। इनमें धन शोधन निवारण कानून के तहत दर्ज एक मामला भी शामिल है।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना न्यायिक रूप से निर्धारित मानकों के विपरीत होगा और इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने राज कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।

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