दिल्ली हाईकोर्ट ने सॉफ्ट लॉन्च के लिए एक दिन का परमिट न लेने की अनजाने में हुई गलती पर शराब कंपनी के खिलाफ दर्ज एक्साइज़ FIR रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली एक्साइज़ एक्ट, 2009 की धारा 33 के तहत शराब और बेवरेज कंपनी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने पाया कि सॉफ्ट लॉन्च पार्टी के लिए एक दिन का शराब परमिट न लेना अनजाने में हुई गलती थी।
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने बताया कि 11-12 सितंबर, 2019 की रात को चाणक्यपुरी के होटल अशोका स्थित सोल क्लब में छापेमारी के दौरान बिना वैध लाइसेंस के शराब परोसी जा रही थी। इसके बाद एक्साइज़ एक्ट की धारा 33 के तहत FIR दर्ज की गई।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 11, 13 और 14 सितंबर, 2019 के लिए रोज़ाना शराब परमिट के लिए आवेदन करना चाहते थे। हालांकि, अनजाने में हुई गलती के कारण 13 सितंबर और 14 सितंबर (दो बार) के लिए आवेदन किए गए, जबकि 11 सितंबर के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया।
कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ताओं के पास शराब परोसने के लिए पहले से ही एक वैध और चालू लाइसेंस है, जो 25 मार्च, 2019 को जारी किया गया और 30 सितंबर, 2019 तक वैध था। कोर्ट ने यह भी देखा कि इस तरह का यह पहला कथित उल्लंघन है।
कोर्ट ने कहा,
"उनकी तरफ से यह पूरी तरह से गलती और अनजाने में हुई (टाइपिंग की) चूक थी, जिसके पीछे कोई गलत इरादा नहीं है।"
कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ताओं ने डिप्टी कमिश्नर/लाइसेंसिंग अथॉरिटी के आदेश के बाद जुर्माने का 50% हिस्सा, यानी ₹10,62,937 पहले ही जमा किया।
इसलिए कोर्ट ने याचिका को मंज़ूरी दी और FIR रद्द की, बशर्ते याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट स्टाफ वेलफेयर फंड और दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन लॉयर्स सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर फंड में ₹1-1 लाख जमा करें।
Case title: Striker Beverages Pvt. Ltd. & Anr. v. State NCT of Delhi