दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय करने का आदेश रद्द किया; कहा- ट्रायल कोर्ट ने ऑडियो सबूत नज़रअंदाज़ किया

Update: 2026-05-27 14:08 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI के भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय करने वाला आदेश रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने रिश्वत की मांग से जुड़े आरोपों की जांच के लिए जिन ऑडियो रिकॉर्डिंग को खुद मंगवाया था, उन्हें सुने बिना ही आगे की कार्रवाई की।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने यह आदेश तब दिया, जब वह आरोपी सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में आरोपी ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत स्पेशल जज द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी थी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 के तहत आरोप तय किए।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि CBI ने बातचीत के जिस लिखित रूप (Transcript) पर भरोसा किया, वह असल ऑडियो बातचीत से अलग था। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि रिकॉर्डिंग पेश करने के पहले के आदेशों के बावजूद, स्पेशल जज ने ऑडियो क्लिप सुने बिना ही आरोप तय कर दिए।

हाईकोर्ट ने गौर किया कि 8 जनवरी, 2026 को स्पेशल जज ने ऑडियो रिकॉर्डिंग वाली CD मंगवाई थीं ताकि उन्हें सुना जा सके। इसके बाद 20 जनवरी को समय की कमी के कारण मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी और रिकॉर्डिंग को दोबारा पेश करने का निर्देश दिया गया। बाद में 23 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया कि आरोप तय करने का फैसला करते समय आरोपी के अनुरोध पर विचार किया जाएगा।

हालांकि, इन सभी प्रक्रियाओं के बावजूद, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि स्पेशल जज ने अंततः रिकॉर्डिंग सुने बिना ही आरोप तय किए।

CBI ने दलील दी कि लिखित रूप (Transcript) की प्रामाणिकता का मामला ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा, और आरोप तय करने के चरण में ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों में 'रिश्वत की मांग' ही सबसे बुनियादी तत्व होता है। उसने कहा कि अगर असल बातचीत की जांच नहीं की जाती तो आरोपी को बिना किसी ठोस आधार के एक लंबे आपराधिक ट्रायल का सामना करना पड़ सकता है।

इस दलील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि चूंकि ट्रायल कोर्ट ने खुद ही ऑडियो रिकॉर्डिंग मंगवाईं, इसलिए उसे आरोप तय करने के मुद्दे पर फैसला लेने से पहले उन रिकॉर्डिंग को सुन लेना चाहिए था।

इसलिए कोर्ट ने स्पेशल जज को निर्देश दिया कि वे ऑडियो रिकॉर्डिंग को सुनें, और उसके बाद कानून के अनुसार, जैसा भी उचित समझें, मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

Case title: Devender Kumar v. CBI

Tags:    

Similar News