दिल्ली हाईकोर्ट ने उपदेशक अनिरुद्धाचार्य के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, AI डीपफेक और मीम कंटेंट पर लगाई रोक

Update: 2026-04-02 05:29 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने आध्यात्मिक उपदेशक अनिरुद्धाचार्य के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक का आदेश दिया। यह आदेश डिजिटल प्लेटफॉर्म पर AI-जनरेटेड कंटेंट, डीपफेक और मीम-आधारित सामग्री के ज़रिए उनके व्यक्तित्व के अनाधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए दिया गया।

जस्टिस तुषार राव गेडेला ने उपदेशक द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई करते हुए यह 'जॉन डो' आदेश पारित किया। उपदेशक ने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतिवादियों, जिनमें अज्ञात संस्थाएं भी शामिल हैं, द्वारा उनकी पहचान, आवाज़, रूप और शिक्षाओं का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है।

अनिरुद्धाचार्य ने दलील दी कि आध्यात्मिक वक्ता के तौर पर उनकी काफी साख और वैश्विक पहचान है और YouTube तथा Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।

यह तर्क दिया गया कि उनका नाम, आवाज़, रूप, बोलने का विशिष्ट अंदाज़, और यहाँ तक कि उनके लोकप्रिय जुमले भी उनके संरक्षित व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों के दायरे में आते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिवादी AI-जनरेटेड वीडियो, डीपफेक, मॉर्फ्ड कंटेंट और मीम बना रहे हैं और उन्हें फैला रहे हैं, जिनमें उन्हें गलत तरीके से अनुचित, भ्रामक और व्यावसायिक संदर्भों में दिखाया जा रहा है। इस आपत्तिजनक सामग्री में मनगढ़ंत समर्थन, उनके प्रवचनों का मज़ाकिया ढंग से तोड़-मरोड़, और डिजिटल हेरफेर के ज़रिए उनकी नकल करना शामिल था।

उनके पक्ष में अंतरिम आदेश पारित करते हुए जस्टिस गेडेला ने कहा कि आध्यात्मिक गुरु का मामला पहली नज़र में काफी मज़बूत प्रतीत होता है। उनकी सुप्रसिद्ध, लोकप्रिय और सर्वमान्य छवि को देखते हुए, न्याय का पलड़ा (Balance of Convenience) उन्हीं के पक्ष में झुकता है।

जज ने कहा,

"यदि मांगी गई एकतरफा अंतरिम रोक और अन्य निर्देश जारी नहीं किए जाते हैं, तो वादी को होने वाले अपूरणीय नुकसान और चोट की भरपाई मौद्रिक रूप से नहीं की जा सकेगी। वादी की छवि और व्यक्तित्व को ठेस पहुँचने और नुकसान होने की आशंका, पहली नज़र में वास्तविक और मौजूदा प्रतीत होती है।"

कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि उल्लंघन करने वाली सामग्री से यह संकेत नहीं मिलता कि वे केवल एक पैरोडी (नकल) मात्र हैं; बल्कि वे अपमानजनक प्रतीत होती हैं और अनिरुद्धाचार्य के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।

कोर्ट ने प्रतिवादियों को आध्यात्मिक वक्ता के नाम, आवाज़, छवि, रूप या व्यक्तित्व का अनाधिकृत रूप से उपयोग करने, उसकी नकल बनाने या उसका व्यावसायिक लाभ उठाने से रोक दिया। इस रोक में AI या डीपफेक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी शामिल है।

कोर्ट ने प्रतिवादियों को ऐसी कोई भी सामग्री बनाने और फैलाने से भी मना किया, जो गलत तरीके से उनका प्रतिनिधित्व करती हो या उनकी नकल करती हो।

जस्टिस गेडेला ने मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms), X और Google जैसे मध्यस्थों (intermediaries) को भी निर्देश दिया कि वे पहचान की गई उल्लंघनकारी सामग्री को हटा दें और उस तक पहुंच को अवरुद्ध कर दें। अनिरुद्धाचार्य को नई कार्यवाही शुरू किए बिना ही उल्लंघन करने वाले अतिरिक्त लिंक्स की सूचना देने और उन्हें तत्काल हटवाने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।

Title: ANIL KUMAR TIWARI ANIRUDHACHARYA v. JOHN DOE ASHOK KUMAR AND ORS

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