दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिकेटर अभिषेक शर्मा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, डीपफेक और बिना अनुमति वाले मर्चेंडाइज़ को हटाने का आदेश दिया

Update: 2026-07-13 14:32 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा करते हुए कई सोशल मीडिया अकाउंट्स, ऑनलाइन सेलर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को उनकी सहमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज़, शक्ल-सूरत और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं का इस्तेमाल करने से रोक दिया।

जस्टिस ज्योति सिंह ने शर्मा द्वारा दायर एक मुकदमे में यह अंतरिम आदेश पारित किया। शर्मा ने आरोप लगाया कि AI से बनी तस्वीरों, मॉर्फ्ड कंटेंट, डीपफेक, झूठे वीडियो और उनके नाम व शक्ल-सूरत वाले मर्चेंडाइज़ की बिना अनुमति बिक्री के ज़रिए उनके व्यक्तित्व का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

कोर्ट ने माना कि क्रिकेटर ने एकतरफा अंतरिम रोक (ex parte ad interim injunction) पाने के लिए प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनाया है और यह भी माना कि सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में है।

कोर्ट ने कहा कि अंतरिम सुरक्षा न देने से उनकी प्रतिष्ठा और व्यावसायिक हितों को अपूरणीय क्षति होगी।

शर्मा के अनुसार, कई Facebook और Instagram अकाउंट्स AI से बनी और मॉर्फ्ड तस्वीरें फैला रहे थे, जिनमें उन्हें मनगढ़ंत और अश्लील स्थितियों में दिखाया गया, जबकि अन्य अकाउंट्स ऐसे वीडियो अपलोड कर रहे थे जिनमें झूठे बयान और अफवाहें हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा पर असर पड़ रहा था।

मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया कि कई व्यापारी बिना अनुमति के शर्मा के नाम और शक्ल-सूरत वाली टी-शर्ट, जर्सी, पोस्टर, फोटो फ्रेम और अन्य मर्चेंडाइज़ बेच रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाया जा रहा था कि इन उत्पादों को उनका समर्थन प्राप्त है।

कोर्ट ने गौर किया कि शर्मा, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया और जिन्हें काफी सार्वजनिक पहचान मिली है, ने अपनी खेल उपलब्धियों और एंडोर्समेंट के ज़रिए मूल्यवान पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स हासिल किए।

कोर्ट ने माना कि कोई भी तीसरा पक्ष उनकी सहमति के बिना उनके नाम, तस्वीर या अन्य विशिष्ट विशेषताओं का व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकता है।

जस्टिस सिंह ने प्रतिवादियों को शर्मा से जुड़े किसी भी AI-जनरेटेड, डीपफेक, फेस-स्वैप्ड, मॉर्फ्ड या अन्यथा हेरफेर किए गए कंटेंट को बनाने, प्रकाशित करने, अपलोड करने या फैलाने से रोक दिया। साथ ही बिना अनुमति के व्यावसायिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए उनके नाम, तस्वीर, आवाज़, शक्ल-सूरत या व्यक्तित्व की अन्य विशेषताओं का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया।

कोर्ट ने ऑनलाइन सेलर्स को शर्मा की व्यक्तित्व विशेषताओं वाले मर्चेंडाइज़ को उनकी सहमति के बिना बनाने, विज्ञापन करने या बेचने से भी रोक दिया।

कोर्ट ने Meta, Amazon, Flipkart और संबंधित सेलर्स को आदेश की कॉपी मिलने के 36 घंटे के भीतर URL हटाने का निर्देश दिया।

Title: ABHISHEK SHARMA v. ASHOK KUMAR & ORS

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