हम विशेषज्ञ नहीं हैं: 'मिर्जापुर: द मूवी' के शूरवीर गाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से केंद्र और सेंसर बोर्ड जाने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' के चरम दृश्य में शूरवीर गीत के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष अपनी शिकायत रखने का सुझाव दिया।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि 16वीं सदी के योद्धा महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किए गए गीत का इस्तेमाल फिल्म में लड़ाई के दृश्य की पृष्ठभूमि में किया गया।
याचिकाकर्ता प्रशांत कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि यह गीत मूल रूप से महाराणा प्रताप को समर्पित है, लेकिन फिल्म में इसका इस्तेमाल काल्पनिक अपराधियों को महिमामंडित करने के लिए किया गया। याचिका में कहा गया कि इससे गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ का स्वरूप बदल सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि फिल्म 4 सितंबर को रिलीज हो चुकी है और बड़े स्तर पर दिखाई जा रही है। इसलिए मामले में तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास जाने में समय लगेगा और तब तक कथित आपत्तिजनक इस्तेमाल से नुकसान जारी रहेगा।
इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता ने अब तक केंद्र सरकार का रुख क्यों नहीं किया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकारी प्रक्रिया में समय लग सकता है और प्रशासनिक अड़चनों के कारण तत्काल राहत मिलना मुश्किल है।
पीठ ने हालांकि याचिका के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त करने से इनकार किया। चीफ जस्टिस ने मौखिक रूप से कहा,
“अगर ऐसा किया जा रहा है तो यह निश्चित रूप से अपमानजनक है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी है।”
अदालत ने कहा कि फिल्म में गीत के इस्तेमाल को कला के रूप में देखा जाए या नहीं, इस पर निर्णय केंद्र सरकार को करना चाहिए क्योंकि अदालत इस विषय की विशेषज्ञ नहीं है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर विशेषज्ञ की भूमिका में नहीं है और याचिकाकर्ता को संबंधित सरकारी प्राधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत रखनी चाहिए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिका के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है।
सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता की ओर से पेश वकील से अदालत ने पूछा कि क्या उन्होंने फिल्म देखी है। वकील ने बताया कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है। इसके बाद चीफ जस्टिस ने निर्माताओं से फिल्म देखने को कहा और मामले को अगली सुनवाई के लिए गुरुवार को सूचीबद्ध कर दिया।
याचिका में फिल्म के चरम दृश्य से 'शूरवीर' गीत को हटाने या उसकी जगह दूसरा गीत इस्तेमाल करने का निर्देश देने की मांग की गई। इसके अलावा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से जुड़े गीतों के फिल्मों में इस्तेमाल को लेकर उचित दिशा-निर्देश बनाने की भी मांग की गई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे गीतों के इस्तेमाल से ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की विरासत का संबंध काल्पनिक अपराधियों या समाज-विरोधी गतिविधियों से नहीं जुड़ना चाहिए। साथ ही याचिका में कलात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को संतुलित करने की बात भी कही गई।
फिल्म में गीत के इस्तेमाल को लेकर उठाई गई आपत्ति पर हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम राय नहीं दी और याचिकाकर्ता को पहले संबंधित सरकारी प्राधिकरण के समक्ष शिकायत रखने को कहा।