टोल कलेक्शन की रियल-टाइम निगरानी के लिए तकनीकी सिस्टम लागू करे NHAI: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-04-21 11:20 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया है कि वह टोल कलेक्शन की रियल-टाइम निगरानी के लिए एक स्वचालित, तकनीक-आधारित सिस्टम विकसित करे, ताकि “विंडफॉल गेन” जैसी स्थितियों की समय रहते पहचान कर सार्वजनिक धन के नुकसान को रोका जा सके।

यह निर्देश महाराष्ट्र के पावनगांव टोल प्लाजा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें टोल कलेक्शन अनुबंध को समय से पहले समाप्त किए जाने को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने अनुबंध समाप्ति को सही ठहराते हुए कहा कि टोल राजस्व में अचानक बढ़ोतरी की समय पर पहचान न होने के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

अदालत ने कहा कि “विंडफॉल गेन” से जुड़े प्रावधान इस उद्देश्य से बनाए जाते हैं कि जब टोल संग्रह अपेक्षा से अधिक हो, तो तत्काल हस्तक्षेप किया जा सके। लेकिन निगरानी और कार्रवाई में देरी से इन प्रावधानों का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।

सुनवाई के दौरान NHAI ने स्वीकार किया कि संबंधित अनुबंध में देरी से कार्रवाई किए जाने के कारण उसे लगभग ₹7.5 लाख प्रतिदिन का नुकसान हुआ। साथ ही, इस लापरवाही के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की गई है।

कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया कि वह एक मजबूत तकनीकी प्रणाली विकसित करे, जिससे टोल कलेक्शन की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सके और “विंडफॉल गेन” की स्थिति की तुरंत पहचान की जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि इस संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस पर अंतिम निर्णय रिकॉर्ड पर रखा जाए।

इसके अतिरिक्त, अदालत ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को यथासंभव छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने उम्मीद जताई कि NHAI पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और सार्वजनिक राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही प्रभावी निगरानी तंत्र लागू करेगा।

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