जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की रिक्यूज़ल सुनवाई के वीडियो हटाने का आदेश, केजरीवाल को नोटिस: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए सोशल मीडिया से अदालत की कार्यवाही के वीडियो हटाने का निर्देश दिया, जो जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की रिक्यूज़ल (मामले से अलग होने) की सुनवाई से संबंधित थे।
यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया गया, जिसमें अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ अदालत की कार्यवाही को कथित रूप से “बिना अनुमति रिकॉर्ड और प्रसारित” करने पर अवमानना कार्रवाई की मांग की गई थी।
जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने गूगल को निर्देश दिया कि वह यूट्यूब के कुछ लिंक हटाए और इस संबंध में हलफनामा दाखिल करे, जबकि मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) द्वारा कुछ लिंक पहले ही हटाए जाने की जानकारी दर्ज की गई।
अदालत ने एक्स (पूर्व ट्विटर) को भी नोटिस जारी करते हुए ऐसे लिंक हटाने को कहा, यदि उनमें अदालत की कार्यवाही के वीडियो पाए जाते हैं।
साथ ही, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यदि भविष्य में ऐसे वीडियो पाता है तो वह संबंधित प्लेटफॉर्म को सूचित करे, जिस पर वे तत्काल कार्रवाई करेंगे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अवैध सामग्री को प्रसारित होने से रोकें।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि 13 अप्रैल की सुनवाई को बिना अनुमति रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
मामले में केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है और अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की गई है।