दिल्ली हाईकोर्ट ने NGT में 'बहुत ज़्यादा' फाइलिंग फीस को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

Update: 2026-04-17 14:29 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने आवेदन, अपील और अन्य तरह के आवेदन दाखिल करने के लिए "बहुत ज़्यादा" फीस लगाने को चुनौती दी गई।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की डिवीज़न बेंच ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ NGT से भी जवाब मांगा।

यह याचिका अजय दुबे नामक व्यक्ति ने दायर की, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (प्रैक्टिसेस एंड प्रोसीजर) रूल्स, 2011 के अलग-अलग प्रावधानों के साथ-साथ एक ऑफिस ऑर्डर को भी चुनौती दी गई, जिसके तहत अतिरिक्त प्रिंटिंग चार्ज लगाए गए।

याचिका के मुताबिक, नियम 12(2) के तहत NGT में आवेदन या अपील दाखिल करने के लिए 1000 रुपये की फीस तय है, जबकि नियम 12(2A) के तहत हर तरह के अन्य आवेदन के लिए कम से कम 500 रुपये की फीस ज़रूरी है, चाहे वह किसी भी तरह का हो।

इसमें आगे यह भी आरोप लगाया गया कि 2019 के ऑफिस ऑर्डर के तहत हर 25 पन्नों पर 100 रुपये का प्रिंटिंग खर्च लगाया जाता है, भले ही फाइलिंग ऑनलाइन की गई हो।

दुबे ने कहा कि इन प्रावधानों की वजह से उन्हें मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक कोयला खनन प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण से जुड़े मुकदमे को आगे बढ़ाने के शुरुआती चरण में ही लगभग 8,200 रुपये देने पड़े।

याचिका में कहा गया,

"....याचिकाकर्ता को आखिर में जो खर्च और फीस देनी पड़ी, वह बहुत ज़्यादा और उनकी पहुंच से बाहर थी, जिससे याचिकाकर्ता के लिए NGT में जनहित से जुड़े (pro bono) मामलों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया और उन्हें बहुत ज़्यादा परेशानी हुई।"

दुबे ने आगे यह भी कहा कि NGT की प्रिंसिपल बेंच में अब ऑनलाइन फाइलिंग का अनिवार्य तरीका अपनाया जाता है और ऑफलाइन या कागज़ी तौर पर फाइलिंग करने का तरीका पूरी तरह से खत्म कर दिया गया।

याचिका में कहा गया कि इस तरह की बहुत ज़्यादा फीस पर्यावरण से जुड़े सही मामलों को आगे बढ़ाने से रोकती है और जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा करने की सरकार की ज़िम्मेदारी को कमज़ोर करती है।

Title: AJAY DUBEY v. UNION OF INDIA, MOEF & ORS

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