आबकारी नीति मामले में केजरीवाल-सिसोदिया को जवाब के लिए अंतिम मौका, 5 अक्टूबर से CBI की दलीलें सुनेगा दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में CBI की उस याचिका पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम मौका दिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा उन्हें आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी गई।
अदालत ने मामले मे CBI की दलीलों की सुनवाई 5 अक्टूबर से शुरू करने का फैसला किया।
जस्टिस मनोज जैन ने सोमवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को CBI की ओर से दाखिल 103 पन्नों की अतिरिक्त लिखित दलीलों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके बाद जवाब दाखिल करने के लिए और समय नहीं दिया जाएगा।
जस्टिस जैन ने मौखिक रूप से कहा,
“हम सभी को चार सप्ताह का समय दे रहे हैं। जो भी जवाब दाखिल करना है। इसी अवधि में दाखिल करें। इसके बाद कुछ नहीं। फिर 5 अक्टूबर से याचिकाकर्ता यानी CBI की ओर से दलीलें शुरू होंगी।”
सुनवाई के दौरान केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से समय मांगा गया। उनके वकीलों ने कहा कि CBI की अतिरिक्त लिखित दलीलें उन्हें सुनवाई से केवल दो दिन पहले मिली हैं और उनमें ऐसे आधार भी उठाए गए, जो मूल पुनरीक्षण याचिका में नहीं थे। इसलिए उन्हें जवाब देने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
केजरीवाल की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने कहा कि CBI की लिखित दलीलें 103 पन्नों की हैं और उनमें ऐसे मुद्दे उठाए गए, जिनका जवाब देना जरूरी है।
सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन ने भी CBI की पुनर्विचार याचिका का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी ने खुद कहा कि निचली अदालत के लंबे फैसले का अध्ययन करने के बाद अतिरिक्त आधार उठाने के लिए अदालत से अनुमति मांगी गई।
हरिहरन ने कहा कि वह यह नहीं कह रहे कि CBI को नए आधार उठाने का अधिकार नहीं है लेकिन यदि नए आधार लिए जाते हैं तो आरोपियों को भी उनका जवाब देने का अवसर मिलना चाहिए।
CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लिखित दलीलों में उठाए गए आधार नए नहीं हैं।
इस पर अदालत ने कहा कि सभी पक्ष चाहते हैं कि दलीलें और जवाब पूरी तरह रिकॉर्ड पर आ जाए ताकि मामले की सुनवाई शुरू की जा सके। अदालत ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दायर वे अर्जियां भी सुनी जाएंगी, जिनमें CBI की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाया गया। हालांकि अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई टुकड़ों में नहीं होगी।
जस्टिस जैन ने कहा,
“दलीलें व्यापक तरीके से सुनी जाएंगी। टुकड़ों में सुनवाई नहीं होगी। हम CBI से शुरू करेंगे और प्रतिवादियों की दलीलों के साथ इसे पूरा करेंगे। दलीलें एक साथ सुनी जाएंगी।”
केजरीवाल और सिसोदिया ने अपनी अर्जियों में कहा है कि निचली अदालत के आरोपमुक्त करने के आदेश के महज चार घंटे के भीतर CBI ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी थी। उन्होंने इसे असाधारण जल्दबाजी बताते हुए याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाया।
एक प्रतिवादी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी ने भी CBI की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहले इस प्रारंभिक आपत्ति पर सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जांच अधिकारी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के लिए सक्षम था या नहीं।
यह मामला पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष चल रहा था। केजरीवाल और अन्य आरोपियों की ओर से जस्टिस शर्मा से अलग होने की मांग की गई, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। इसके बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने उनके समक्ष सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया और कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से सुनवाई में शामिल नहीं होंगे।
जस्टिस शर्मा ने बाद में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद मामले को जस्टिस मनोज जैन के समक्ष स्थानांतरित किया गया।
अवमानना मामले में खंडपीठ ने केजरीवाल और अन्य आप नेताओं को नोटिस भी जारी किया। इसके अलावा केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, आप नेता गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास से जुड़े एक अलग अवमानना मामले में भी नोटिस जारी किए गए।
27 फरवरी को निचली अदालत ने आबकारी नीति मामले में सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित कई राजनीतिक नेता शामिल थे। निचली अदालत ने अपने फैसले में सीबीआई की जांच की प्रक्रिया पर भी कड़ी टिप्पणियां की थीं।
CBI ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका के माध्यम से चुनौती दी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने 9 मार्च को मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया।
इसके बाद केजरीवाल और सिसोदिया समेत कुछ आरोपियों ने जस्टिस शर्मा से अलग होने की मांग की थी। उनका कहना था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका है। जस्टिस शर्मा ने इन अर्जियों को खारिज कर मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया था।
आबकारी नीति मामले के चलते केजरीवाल और सिसोदिया को लंबे समय तक जेल में भी रहना पड़ा था। केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने 156 दिन हिरासत में रहने के बाद जमानत दी थी, जबकि सिसोदिया ने इस मामले में 530 दिन हिरासत में बिताए।
अब दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की पुनर्विचार याचिका पर 5 और 6 अक्टूबर को विस्तृत दलीलें सुनी जाएंगी।