दिल्ली हाईकोर्ट का Rapido को निर्देश: दृष्टिबाधित यूज़र्स के लिए पहुंच सुनिश्चित करें

Update: 2026-04-24 04:55 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय राइड-हेलिंग सर्विस Rapido को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसका एप्लिकेशन, जब तक भी वह चालू रहता है, अपने यूज़र्स के लिए हर तरह से 'दिव्यांग-अनुकूल' बना रहे।

जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सर्विस देने वालों का यह सकारात्मक कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि डिजिटल इंटरफ़ेस स्वाभाविक रूप से सुलभ हों। साथ ही सहायक तकनीकों के साथ संगत हों; इनमें स्क्रीन रीडर और दृष्टिबाधित व्यक्तियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य पहुंच उपकरण शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा,

"ऐसे डिज़ाइन सिद्धांतों को शामिल करने में कोई भी विफलता प्रभावी पहुंच से वंचित करने के बराबर होगी, जिससे अधिनियम के तहत गारंटीकृत वास्तविक समानता कमज़ोर होगी।"

जस्टिस कौरव ने दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों (जिनमें एक दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता भी शामिल थे) द्वारा दायर याचिका का निपटारा किया।

बता दें, उक्त याचिका में यह चिंता जताई गई थी कि Rapido ऐप स्क्रीन रीडर जैसी सहायक तकनीकों के साथ संगत नहीं था, जिससे राइड बुक करने, ट्रैक करने और रद्द करने जैसे ज़रूरी कामों में रुकावट आ रही थी।

उन्होंने पहुंच ऑडिट, पहुंच मानकों को लागू करने, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और नियमों का पालन न करने पर जुर्माना लगाने के निर्देश देने की मांग की थी।

Title: AMAR JAIN AND ANR v. ROPPEN TRANSPORTATION SERVICES PVT LTD (RAPIDO) AND ORS

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