DOE की 15 दिन में मंजूरी नहीं मिली तो निजी स्कूल कर्मचारी का निलंबन स्वतः खत्म, बाद की मंजूरी से नहीं होगा बहाल : दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ
दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूल के किसी कर्मचारी का निलंबन, यदि 15 दिनों के भीतर शिक्षा निदेशक (DOE) की मंजूरी प्राप्त नहीं करता है, तो वह समाप्त हो जाएगा।
इसके बाद यदि DOE मंजूरी भी दे देता है तब भी समाप्त हो चुके निलंबन को दोबारा प्रभावी नहीं किया जा सकता।
पूर्ण पीठ में जस्टिस सी. हरि शंकर, जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला और जस्टिस रेणु भटनागर शामिल थे। पीठ ने कहा कि यदि स्कूल प्रबंधन को इसके बाद भी कर्मचारी को निलंबित रखना आवश्यक लगता है तो उसे DOE से पहले से मंजूरी लेकर नया निलंबन आदेश जारी करना होगा।
पीठ ने कहा,
"यदि 15 दिनों के भीतर शिक्षा निदेशक की मंजूरी नहीं मिलती है, तो दूसरे उपबंध के अनुसार निलंबन स्वतः समाप्त हो जाता है। इसके बाद दी गई मंजूरी का कोई महत्व नहीं रह जाता, क्योंकि उस समय तक निलंबन अस्तित्व में ही नहीं रहता। मृत शरीर में दोबारा जान नहीं डाली जा सकती।"
यह फैसला दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 8(4) के दूसरे उपबंध की व्याख्या को लेकर दो अलग-अलग खंडपीठों के फैसलों में उत्पन्न मतभेद को सुलझाने के लिए दिया गया।
धारा 8 मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित है। धारा 8(4) के अनुसार किसी कर्मचारी को निलंबित करने से पहले शिक्षा निदेशक की पूर्व मंजूरी आवश्यक है।
हालांकि, पहले उपबंध में यह व्यवस्था है कि यदि गंभीर कदाचार के कारण तत्काल निलंबन जरूरी हो, तो बिना पूर्व मंजूरी के भी कर्मचारी को निलंबित किया जा सकता है।
दूसरे उपबंध में स्पष्ट किया गया कि ऐसा तत्काल निलंबन 15 दिनों से अधिक प्रभावी नहीं रहेगा, जब तक कि इस अवधि के भीतर इसकी सूचना शिक्षा निदेशक को देकर उनकी मंजूरी प्राप्त न कर ली जाए।
पूर्ण पीठ के समक्ष मुख्य प्रश्न यह था कि यदि 15 दिन की वैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद शिक्षा निदेशक मंजूरी देता है, तो क्या पहले दिया गया निलंबन आदेश फिर से प्रभावी हो सकता है।
पीठ ने इस प्रश्न का स्पष्ट रूप से नकारात्मक उत्तर दिया। अदालत ने कहा कि कानून की भाषा बिल्कुल स्पष्ट है और 15 दिन के भीतर मंजूरी नहीं मिलने पर निलंबन स्वतः समाप्त हो जाता है। बाद में दी गई मंजूरी समाप्त हो चुके निलंबन को दोबारा जीवित नहीं कर सकती।
अदालत ने कहा कि यदि इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन कर्मचारी को निलंबित करना चाहता है, तो उसे शिक्षा निदेशक की पूर्व मंजूरी प्राप्त कर नया निलंबन आदेश जारी करना होगा।
पूर्ण पीठ ने कहा कि यह व्याख्या पहले दिए गए पूर्ण पीठ के फैसले तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप है, जिनमें समाप्त हो चुके निलंबन को पुनर्जीवित करने के बजाय नया निलंबन आदेश जारी करने की प्रक्रिया को स्वीकार किया गया।
पीठ ने उस पूर्व फैसले से असहमति जताई, जिसमें यह माना गया था कि 15 दिन बाद मिली मंजूरी से निलंबन फिर से प्रभावी हो सकता है।
अदालत ने कहा कि विलंब से दी गई मंजूरी को धारा 8(4) का पालन नहीं माना जा सकता और न ही स्कूल प्रबंधन कर्मचारी को लगातार निलंबित मानकर कानून में निर्धारित समय-सीमा को बढ़ा सकता है।
इस संदर्भ में मूल रिट याचिका को अब 31 जुलाई, 2026 को उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।