अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्ति पर DoE दखल नहीं दे सकता, केवल योग्यता तय कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सहायता प्राप्त (Aided) अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार संस्थान के प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा निदेशालय (DoE) केवल नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और अनुभव निर्धारित कर सकता है, लेकिन इसके अलावा कोई अन्य शर्त या प्रतिबंध नहीं लगा सकता।
जस्टिस जसमीत सिंह ने एक सहायता प्राप्त ईसाई अल्पसंख्यक विद्यालय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने संस्थान का प्रबंधन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, जिसमें शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति भी शामिल है।
अदालत ने DoE के 18 जुलाई 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें स्कूल की भर्ती प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, कोर्ट ने 19 नव-नियुक्त कर्मचारियों के वेतन के लिए अनुदान (Grant-in-Aid) चार सप्ताह के भीतर जारी करने का भी निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि नियुक्त किए गए कर्मचारी राज्य द्वारा निर्धारित योग्यता या अनुभव की शर्तों को पूरा नहीं करते। ऐसे में DoE भर्ती प्रक्रिया रोकने या वेतन अनुदान रोकने का अधिकार नहीं रखता। कोर्ट ने T.M.A. Pai Foundation v. State of Karnataka के फैसले का हवाला देते हुए दोहराया कि राज्य शैक्षणिक मानकों को बनाए रखने के लिए नियम बना सकता है, लेकिन अल्पसंख्यक संस्थानों के कर्मचारियों की नियुक्ति के मूल अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।