दिल्ली हाईकोर्ट ने BRPL और BYPL की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित CAG ऑडिट के लिए जारी शो कॉज नोटिस को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस तेजस करिया ने कहा कि शो कॉज नोटिस के खिलाफ रिट याचिका सामान्यतः सुनवाई योग्य नहीं होती। अदालत ने कहा कि नोटिस में कंपनियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं है, बल्कि उन्हें CAG ऑडिट के प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
कंपनियों का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट और APTEL के आदेश CAG ऑडिट की अनुमति नहीं देते। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि रेगुलेटरी एसेट्स की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित ऑडिट का दायरा व्यापक है और इसमें डिस्कॉम के रिकॉर्ड व वित्तीय स्थिति की समीक्षा भी शामिल हो सकती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑडिट एजेंसी निर्धारित नहीं की थी और CAG को ऑडिट करने से नहीं रोका था। इसलिए याचिका में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।