बैंक गार्ड की नौकरी में आपराधिक जानकारी छिपाना गंभीर, नियुक्ति रद्द करना सही: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-04-21 06:56 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक में गार्ड जैसे पद पर नियुक्ति के दौरान उम्मीदवार के आपराधिक पृष्ठभूमि की पूरी और सच्ची जानकारी देना अनिवार्य है, क्योंकि इस पद में हथियारों का उपयोग शामिल होता है। कोर्ट ने इसी आधार पर एक बैंक गार्ड की सेवा समाप्ति को सही ठहराया।

जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कार्यरत गार्ड की याचिका खारिज की, जिसने अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती दी थी।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने नियुक्ति के समय भरे गए सत्यापन फॉर्म में यह बताया था कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है जबकि वास्तव में उसके खिलाफ FIR दर्ज थी। यह तथ्य पुलिस सत्यापन के दौरान सामने आया।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भले ही बाद में याचिकाकर्ता उस मामले में बरी हो गया हो, लेकिन नियुक्ति के समय दी गई गलत जानकारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा,

“गार्ड का पद ऐसा है, जिसमें हथियारों का उपयोग होता है। इसलिए उम्मीदवार के चरित्र और पृष्ठभूमि की सख्त और सच्ची जानकारी आवश्यक है।”

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि सत्यापन फॉर्म में सही जानकारी देना भर्ती प्रक्रिया का मूल आधार है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। नियोक्ता को यह अधिकार है कि वह उम्मीदवार की उपयुक्तता के आधार पर सेवा जारी रखने या समाप्त करने का निर्णय ले।

साथ ही कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता अभी परिवीक्षा अवधि में था और उसकी सेवा की पुष्टि (कन्फर्मेशन) पूरी तरह चरित्र और पृष्ठभूमि के संतोषजनक सत्यापन पर निर्भर थी।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की और सेवा समाप्ति को वैध ठहराया।

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