दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल से नर्सों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाने पर विचार करने को कहा

Update: 2026-04-09 03:17 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल से नर्सों के लिए शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए दिया, जिसमें इस पेशे के भीतर शिकायतों को सुलझाने के लिए एक प्रभावी प्रणाली की कमी को उजागर किया गया।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच इंडियन प्रोफेशनल नर्सेस एसोसिएशन द्वारा दायर PIL की सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में नर्सिंग पेशेवरों को पेश आने वाली शिकायतों को सुलझाने के लिए किसी तंत्र की कमी पर चिंता जताई गई।

याचिका में यह भी बताया गया कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा जारी मौजूदा सर्कुलर के बावजूद, जिनमें स्टूडेंट्स पर 'सर्विस बॉन्ड' (सेवा अनुबंध) थोपने पर रोक लगाई गई, कई संस्थान कथित तौर पर अभी भी ऐसी प्रथाओं को जारी रखे हुए।

सुनवाई के दौरान, नर्सिंग काउंसिल के वकील ने कोर्ट को बताया कि संबंधित सर्कुलर का पालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि एक उचित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने के मुद्दे पर विचार किए जाने की आवश्यकता है।

इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया:

“एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने के लिए, जहां शिकायतों को उचित तरीके से निपटाया जा सके, याचिकाकर्ता इंडियन नर्सिंग काउंसिल के सचिव के समक्ष एक उचित अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत करके अपना पक्ष रख सकता है। इस अभ्यावेदन में याचिकाकर्ता वे सभी तर्क शामिल कर सकता है, जो उसके पास उपलब्ध हों। साथ ही वे सभी दस्तावेज़ भी संलग्न कर सकता है जिन पर वह भरोसा करना चाहता है।”

कोर्ट ने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि इस अभ्यावेदन पर निर्णय लेते समय काउंसिल को एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए ज़रूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान हो और शिकायतकर्ताओं को उनके समाधान के बारे में सूचित किया जाए।

Case title: Indian Professional Nurses Association v. Union Of India Ministry Of Health And Family Welfare & Anr.

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