समन न मानने पर केजरीवाल की बरी पर ED की चुनौती, आबकारी नीति मामले में नोटिस जारी: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-04-01 08:09 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन का पालन न करने के मामलों में बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने पारित किया। अदालत ने केजरीवाल से जवाब मांगा है और मामले को 29 अप्रैल को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही, ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड (TCR) भी तलब किया गया है।

मामला कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा है, जिसमें ED ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने जांच में शामिल होने के लिए जारी किए गए समनों का जानबूझकर पालन नहीं किया। एजेंसी के अनुसार, उन्हें 2 नवंबर और 21 दिसंबर 2023 तथा 3 और 18 जनवरी 2024 को समन भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने इनका अनुपालन नहीं किया और इन्हें अवैध बताया।

22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को इन मामलों में बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए ED ने हाईकोर्ट का रुख किया और दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने गंभीर त्रुटि की है, क्योंकि यह तथ्य विवादित नहीं है कि समन प्राप्त होने के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि केजरीवाल अग्रिम सूचना के बावजूद उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद ताजा नोटिस जारी किया गया।

मामले से जुड़े अन्य घटनाक्रम में, केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को ED द्वारा गिरफ्तार किया गया था। 20 जून 2024 को उन्हें ट्रायल कोर्ट से जमानत मिली, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया। इसके पश्चात जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की थी।

ED का आरोप है कि आबकारी नीति एक साजिश के तहत लागू की गई थी, जिसके जरिए कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। अब हाईकोर्ट को यह तय करना है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया बरी करने का आदेश विधि सम्मत था या नहीं।

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