बॉलीवुड कलाकार जाह्नवी कपूर और विवेक ओबेरॉय की ओर से दायर पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मुकदमों में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एमिकस क्यूरी नियुक्त किए। कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में प्रचार अधिकार और पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर विचार किया जाना जरूरी है।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने जाह्नवी कपूर के मामले में वकील गौतम भाटिया और विवेक ओबेरॉय के मामले में वकील रोहन अल्वा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।

कोर्ट इन मामलों में खास तौर पर इस सवाल पर विचार करेगा कि पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा मांगने वाले मामलों में अदालत के समक्ष किए गए अनुरोध कितने व्यापक हो सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में ऐसे व्यापक अनुरोध मानहानि या व्यंग्य जैसे दूसरे पहलुओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। इन मुद्दों पर अक्टूबर में सुनवाई होगी।

गुरुवार को जाह्नवी कपूर के मामले की सुनवाई के दौरान उनकी ओर से पेश वकील ने बताया कि पिछली सुनवाई के आदेश के अनुसार मामले में शामिल विभिन्न कड़ियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया। इनमें पहली श्रेणी ऐसी सामग्री की है, जो पहली नजर में अश्लील और यौन रूप से आपत्तिजनक है। दूसरी श्रेणी में ऐसी सामग्री शामिल है, जो सीधे तौर पर जाह्नवी कपूर के पर्सनैलिटी राइट्स का व्यावसायिक इस्तेमाल करती है। तीसरी श्रेणी में ऐसी सामग्री है, जिसमें उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल सामान और सेवाओं की बिक्री को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने के लिए किया गया।

कोर्ट को बताया गया कि सोशल मीडिया मंचों पर जाह्नवी कपूर के खिलाफ यौन रूप से आपत्तिजनक सामग्री से जुड़ी करीब 1,400 कड़ियों की पहचान की गई। उनकी ओर से अनुरोध किया गया कि ऐसी सामग्री हटाने की मांग पर जल्द सुनवाई की जाए।

इस पर कोर्ट ने कहा कि जाह्नवी कपूर के मामले में यौन रूप से स्पष्ट सामग्री हटाने के मुद्दे पर इसी महीने सुनवाई की जाएगी।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जाह्नवी कपूर के खिलाफ अश्लील सामग्री हटाने का निर्देश दिया था। हालांकि, कोर्ट ने मामले में शामिल सभी 6,884 कड़ियों को एक साथ हटाने का व्यापक आदेश देने से इनकार किया था।

जाह्नवी कपूर की ओर से इंडिया लॉ एलएलपी के साझेदार आसव राजन और आभा शाह पेश हुए।

वहीं, विवेक ओबेरॉय के मामले में फरवरी में एक समकक्ष पीठ ने अंतरिम आदेश जारी कर उनके पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की थी। कोर्ट ने संबंधित संस्थाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से उनके पर्सनैलिटी राइट्स और प्रचार अधिकारों का अनुचित इस्तेमाल या व्यावसायिक शोषण करने से रोक दिया था।

इस संरक्षण में विवेक ओबेरॉय के नाम, तस्वीर, आवाज, चेहरे, समानता और उनकी पहचान से जुड़े अन्य विशिष्ट पहलुओं का इस्तेमाल शामिल था।

ब हाईकोर्ट अक्टूबर में दोनों मामलों में पर्सनैलिटी राइट्स और प्रचार अधिकारों से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई करेगा।

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