दिल्ली हाईकोर्ट ने AITA के चुनाव नतीजों को घोषिथ करने की दी मंजूरी, नए खेल कानून के तहत नए चुनाव कराने का दिया आदेश

Update: 2026-04-28 04:22 GMT

दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर 2024 में हुए ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) के चुनाव नतीजों को घोषित करने की मंज़ूरी दी। कोर्ट ने नई चुनी गई संस्था को फेडरेशन के रोज़मर्रा के कामकाज को संभालने के लिए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर काम करने की इजाज़त दी। साथ ही यह निर्देश भी दिया कि नए चुनाव 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025' और 'स्पोर्ट्स गवर्नेंस रूल्स, 2026' के मुताबिक कराए जाएं।

जस्टिस मिनी पुष्करणा ने AITA चुनावों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि याचिका पर सुनवाई के दौरान, राष्ट्रीय खेल फेडरेशनों को नियंत्रित करने वाला एक नया कानूनी ढांचा लागू हो गया।

कोर्ट ने कहा कि 'नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट कोड ऑफ़ इंडिया, 2011' के पालन से जुड़े जो मुद्दे पहले उठाए गए, वे 2025 के नए कानून के लागू होने के बाद अब ज़्यादातर अकादमिक (सिर्फ़ सैद्धांतिक) रह गए।

नए कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि AITA समेत सभी राष्ट्रीय खेल संस्थाओं को अब अपने उप-नियमों (bye-laws) को 'स्पोर्ट्स एक्ट, 2025' और 2026 के नियमों के प्रावधानों के मुताबिक बनाना होगा। इन नियमों में उम्र और कार्यकाल की सीमाएं, खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व और समय-समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछली कार्यकारी समिति (2020–2024) का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है और अंतरिम आदेशों के आधार पर उसे अनिश्चित काल तक काम करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

साथ ही कोर्ट ने युवा मामले और खेल मंत्रालय के इस रुख को भी नोट किया कि 2024 के चुनावों के नतीजे घोषित किए जा सकते हैं, ताकि 'संक्रमणकालीन व्यवस्था' (Transitional Arrangement) बनाई जा सके।

AITA के भीतर "साफ़ तौर पर दिख रही गुटबाज़ी" को उजागर करते हुए—जिसमें कई पदाधिकारी फेडरेशन का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे थे—कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आपसी मतभेद खेल के प्रशासन के लिए नुकसानदायक हैं। उन्हें नए कानूनी ढांचे के पालन में बाधा डालने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि 28 सितंबर, 2024 को हुए चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएं, और चुनी हुई कार्यकारी समिति तब तक एक अंतरिम संस्था के तौर पर काम करे, जब तक कि संशोधित उप-नियमों के तहत नए चुनाव नहीं हो जाते। कामकाज में किसी भी तरह की रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस, जस्टिस (रिटायर्ड) गीता मित्तल को AITA के कामकाज की देखरेख के लिए प्रशासक नियुक्त किया।

प्रशासक को नए कानून के मुताबिक AITA के संविधान और उप-नियमों में संशोधन की देखरेख करने, इलेक्टोरल कॉलेज तैयार करने और तय समय-सीमा के भीतर नए चुनाव करवाने का काम सौंपा गया।

कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि अंतरिम कार्यकारी समिति को प्रशासक के साथ पूरा सहयोग करना होगा; प्रशासक वित्तीय कामकाज की भी देखरेख करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि इस अंतरिम अवधि के दौरान बिना उनकी मंज़ूरी के कोई भी बड़ा वित्तीय फ़ैसला न लिया जाए।

Case title: Anil Dhupar v. Chintan N Parikh & Ors

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