आबकारी नीति केस: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा बोलीं- “मेरे खिलाफ अपमानजनक सामग्री पोस्ट की गई, अवमानना कार्रवाई करूंगी”

Update: 2026-05-14 10:50 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गुरुवार को कहा कि आबकारी नीति भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ “बेहद मानहानिकारक, अपमानजनक और अवमाननापूर्ण” सामग्री पोस्ट की गई है, जिसके चलते वह कुछ व्यक्तियों और प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करेंगी।

जस्टिस शर्मा यह टिप्पणी उस समय कर रही थीं, जब वह CBI की उस याचिका पर सुनवाई करने वाली थीं, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को डिस्चार्ज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है।

कोर्ट अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से पेश होने के लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी नियुक्त करने पर आदेश पारित करने वाली थी। इन नेताओं ने जस्टिस शर्मा के समक्ष कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस शर्मा ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा,

“आज मैं एमिकस के नाम घोषित करने वाली थी। मैंने प्रयास किए थे और कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सहमति भी दी थी। लेकिन इस बीच मेरे संज्ञान में आया कि मेरे खिलाफ बेहद मानहानिकारक और अपमानजनक सामग्री पोस्ट की गई है। मैंने कुछ प्रतिवादियों और अवमाननाकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है। मैं चुप नहीं रह सकती।”

कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में विस्तृत आदेश शाम 5 बजे पारित किया जाएगा।

गौरतलब है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों, जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता शामिल हैं, को डिस्चार्ज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने CBI जांच की भी कड़ी आलोचना की थी।

बाद में CBI ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने prima facie कहा था कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं।

इसके बाद केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा से मामले से अलग होने की मांग करते हुए recusal applications दायर की थीं। हालांकि पिछले सप्ताह जस्टिस शर्मा ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया और स्वयं मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया।

इसके बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने कोर्ट को पत्र लिखकर कहा कि वे जस्टिस शर्मा के समक्ष सुनवाई का बहिष्कार करेंगे और न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के जरिए पेश होंगे।

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