न्यायिक समीक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद 'काल्पनिक प्रावधान' को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सार्वजनिक ठेकों में पात्रता से जुड़े विवादों की जांच करते समय अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद किसी "काल्पनिक प्रावधान" को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं।
जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने यह स्पष्ट किया कि जब टेंडर में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होता, जिसके तहत किसी निलंबित या बीच में छोड़े गए काम को पूरा हुआ मान लिया जाए—सिर्फ इसलिए कि काम छोड़ने की वजह सरकार थी—तो अदालतें टेंडर की शर्तों को फिर से लिखकर ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकतीं।
इस प्रकार, अदालत ने CPWD के पुनर्विकास टेंडर में याचिकाकर्ता की तकनीकी बोली (Technical Bid) को खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।
याचिकाकर्ता ने पिछले अनुभव से जुड़ी पात्रता की शर्त को पूरा करने के लिए दिल्ली के LNJP अस्पताल में किए गए अपने काम का हवाला दिया। हालांकि, वह प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही सरकार द्वारा निलंबित कर दिया गया और बाद में उसे बीच में ही छोड़ दिया गया।
अदालत के सामने याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया कि सरकार की वजह से काम पूरा न होने के लिए उसे दंडित नहीं किया जा सकता। साथ ही यह दलील दी कि उसके द्वारा किया गया काम मूल अनुबंध मूल्य (original contract value) से काफी अधिक था।
उसने आगे यह भी तर्क दिया कि टेंडर की जिस शर्त में "प्रोजेक्ट/काम की पूरी लागत" का ज़िक्र है, उसकी व्याख्या इस तरह से की जानी चाहिए कि उसमें उसके द्वारा किए गए काम का मूल्य भी शामिल हो—भले ही पूरा प्रोजेक्ट अधूरा ही क्यों न रह गया हो।
इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने फैसला सुनाया कि टेंडर की शर्त 7.1 में विशेष रूप से "संतोषजनक रूप से पूरा किए गए" काम की मांग की गई। उसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसके तहत निलंबित या बीच में छोड़े गए काम को सिर्फ इसलिए पूरा मान लिया जाए, क्योंकि काम छोड़ने की वजह सरकार थी।
बेंच ने टिप्पणी की,
"न्यायिक समीक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालत ऐसा कोई काल्पनिक प्रावधान अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकती, जो टेंडर में खुद मौजूद न हो।"
अदालत ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि काफी अधिक आर्थिक मूल्य का काम कर लेना, उसे संतोषजनक रूप से पूरा करने के बराबर नहीं माना जा सकता—खासकर तब, जब टेंडर की शर्तों में काम को पूरा करना स्पष्ट रूप से पात्रता का एक मापदंड (Eligibility Criterion) बनाया गया हो।
तदनुसार, रिट याचिका खारिज की गई।
Case title: Swadeshi Civil Infrastructure Private Limited v. The Executive Engineer And Senior Manager C III Redevelopment Project Division Cpwd & Ors.