वकील को अलॉट हुए चैंबर पर एसोसिएट उस चैंबर को इस्तेमाल करने का पक्का अधिकार नहीं मांग सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-04-03 03:55 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई वकील, जो किसी चैंबर का इस्तेमाल सिर्फ़ मूल अलॉटी (जिसे चैंबर अलॉट हुआ था) के एसोसिएट के तौर पर कर रहा है, उसे उस जगह पर कोई पक्का अधिकार नहीं मिल जाता, क्योंकि वह सिर्फ़ "इजाज़त से इस्तेमाल करने वाला" (Permissive User) है।

जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव वकील अंजू तंवर की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में उन्होंने साकेत कोर्ट्स की चैंबर अलॉटमेंट कमेटी (CAC) के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें चैंबर खाली करने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट ने पाया कि चैंबर दो वकीलों के नाम पर अलॉट किया गया। तंवर को उन वकीलों में से एक के एसोसिएट के तौर पर चैंबर इस्तेमाल करने की इजाज़त दी गई।

जस्टिस कौरव ने कहा कि CAC ने सही नतीजा निकाला कि तंवर चैंबर की सिर्फ़ एक "इजाज़त से इस्तेमाल करने वाली" थीं। चूंकि ऐसी कोई पॉलिसी, नियम या रेगुलेशन नहीं है, जो उन्हें यह अधिकार देता हो, इसलिए उन्हें उस जगह को इस्तेमाल करने का कोई पक्का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा,

"कोर्ट CAC द्वारा लिए गए फ़ैसले में दखल नहीं दे सकता।"

तंवर के इस तर्क पर कि उन्होंने मूल अलॉटीज़ को कुछ पैसे दिए, कोर्ट ने कहा कि अगर वह चाहें तो उन पैसों या हर्जाने की वसूली के लिए उचित कानूनी कदम उठा सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हाईकोर्ट इस मामले पर विचार नहीं कर सकता।

कोर्ट ने कहा,

"वैसे भी यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मूल अलॉटीज़ को चैंबर को किसी और को सब-लेट (किराए पर देना) करने का अधिकार नहीं था।"

अलॉटमेंट रद्द करने की मांग के संबंध में जस्टिस कौरव ने कहा कि इस शिकायत पर विचार करना CAC का काम है। अगर कमेटी को लगता है कि मूल अलॉटीज़ ने लागू नियमों और शर्तों में से किसी का उल्लंघन किया है तो उसके अनुसार ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी।

Title: ANJU TANWAR v. LAWYERS CHAMBERS ALLOTMENT COMMITTEE & ORS

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