राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण की श्रीमती वीनू गुप्ता (अध्यक्ष) की पीठ ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 3 के तहत परियोजना को पंजीकृत करने में विफल रहने के लिए बिल्डरों पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

मामले की पृष्ठभूमि:

दिनांक 19.10.24 को प्राधिकरण ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए बिल्डर को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें बिल्डर से स्पष्टीकरण देने को कहा गया कि क्यों न RERA की धारा 59 (1) के तहत उन पर जुर्माना लगाया जाए।

इसके बाद, प्राधिकरण द्वारा दिनांक 12.02.21 को पारित एक आदेश में, प्राधिकरण ने बिल्डर को 45 दिनों के भीतर RERA की धारा 3 के तहत परियोजना को पंजीकृत करने का निर्देश दिया।

बाद में, 09.05.22 को, प्राधिकरण ने एक और आदेश पारित किया जिसमें उसने बिल्डर को 30 दिनों के भीतर पूरे प्रोजेक्ट सिटी ट्रेड सेंटर को एक एकल परियोजना या परियोजना के दो स्वतंत्र चरणों के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया। दो आदेशों के बावजूद, बिल्डर RERA 2016 की धारा 3 के तहत परियोजना को पंजीकृत करने में विफल रहा।

रेरा का आदेश:

प्राधिकरण ने पाया कि प्राधिकरण के बार-बार निर्देश के बावजूद बिल्डर ने अब तक परियोजना को पंजीकृत नहीं किया है और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि बिल्डर अधिनियम की धारा 3 के तहत परियोजना को पंजीकृत करने के प्राधिकरण के आदेशों का पालन करने में विफल रहे हैं।

प्राधिकरण ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 59 को संदर्भित किया, जो निम्नानुसार है:

धारा 59: धारा 3 के तहत पंजीकरण न करने के लिए सजा।

(1) यदि कोई प्रवर्तक धारा 3 के उपबंधों का उल्लंघन करता है तो वे प्राधिकरण द्वारा यथा अवधारित स्थावर संपदा परियोजना की अनुमानित लागत के दस प्रतिशत तक शास्ति के लिए दायी होंगे।

(2) यदि कोई प्रमोटर उपधारा (1) के तहत जारी किए गए आदेशों, निर्णयों या निर्देशों का पालन नहीं करता है या धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन करना जारी रखता है, तो वे तीन साल तक की अवधि के लिए कारावास या जुर्माने के साथ दंडनीय होंगे अचल संपत्ति परियोजना की अनुमानित लागत का दस प्रतिशत तक, या दोनों के साथ।

इसके अलावा, प्राधिकरण ने नोट किया कि परियोजना की कुल लागत 11,00,28,5551 रुपये है, जिसमें अनुमानित भवन लागत और भूमि की लागत शामिल है। इसलिए धारा 59 (1) के प्रावधान के अनुसार प्राधिकरण ने बिल्डरों पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

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