होम लोन बंद करते समय अधिक वसूली पर SBI सेवा में कमी का दोषी: चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग
जिला उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया। आयोग ने पाया कि बैंक ने बैंकिंग लोकपाल के पुनर्गणना संबंधी निर्देशों के बावजूद होम लोन बंद करते समय उधारकर्ता (शिकायतकर्ता) से अधिक राशि वसूल ली।
मामले के संक्षिप्त तथ्य:
शिकायतकर्ता दिलबर सिंह ने वर्ष 2009 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ₹5,00,000 का होम लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर 15 वर्ष की अवधि के लिए लिया था। उन्होंने ईसीएस के माध्यम से नियमित रूप से EMI का भुगतान किया।
वर्ष 2019 में लगभग दस वर्ष तक भुगतान करने के बाद उन्हें सूचित किया गया कि ₹4,57,325 अभी भी बकाया है। अपने ऋण खाते की जांच करने पर उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने सहमत दर से अधिक ब्याज लागू किया है। उनकी शिकायतों पर कार्रवाई न होने पर उन्होंने आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल से संपर्क किया।
लोकपाल ने बैंक को निर्देश दिया कि वह निर्दिष्ट तिथियों से लागू बेस रेट और एमसीएलआर के आधार पर ऋण खाते की पुनर्गणना करे। इसके अनुपालन में बैंक ने शिकायतकर्ता के खाते में ₹96,922 जमा किए और संशोधित विवरण जारी किया, जिसमें बकाया राशि कम दिखाई गई।
हालांकि, 11 जुलाई 2019 को ऋण बंद करते समय शिकायतकर्ता से ₹2,01,728 की राशि जमा कराई गई और उन्हें “नो ड्यू सर्टिफिकेट” जारी किया गया। शिकायतकर्ता का कहना था कि यह राशि वास्तविक बकाया से अधिक थी, इसलिए उन्होंने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता शिकायत दायर की।
बैंक की दलीलें:
बैंक ने कहा कि ब्याज लागू नियमों के अनुसार लगाया गया था और शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत खाता विवरण में मैनुअल तैयारी के कारण त्रुटियां थीं, जिनमें बार-बार क्रेडिट प्रविष्टियां शामिल थीं। बैंक के अनुसार इन त्रुटियों को बाद में सुधार दिया गया, संशोधित विवरण जारी किया गया और लोकपाल के आदेश के अनुसार ₹96,922 वापस कर दिए गए, इसलिए कोई अतिरिक्त राशि देय नहीं थी। बैंक ने सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार से इनकार किया।
आयोग की टिप्पणियां और निर्णय:
आयोग ने पाया कि लोकपाल के निर्देशों के बाद बैंक ने पुनर्गणना कर ₹96,922 जमा किए थे। आयोग ने यह भी नोट किया कि 27 जून 2019 को बकाया ₹59,155 था, जो 11 जुलाई 2019 (ऋण बंद होने की तिथि) तक बढ़कर ₹62,857 हो गया।
इसके बावजूद बैंक ने ऋण बंद करते समय शिकायतकर्ता से ₹2,01,728 वसूल किए। खाते के विवरण और गणना का परीक्षण करने के बाद आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि बैंक ने ₹41,949 की अतिरिक्त राशि वसूल की।
फलस्वरूप, आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह ₹41,949 की राशि 11 जुलाई 2019 से वसूली की तिथि से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। साथ ही ₹10,000 क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के रूप में 60 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया।