कन्फर्म टिकट के बावजूद सीट नहीं मिली, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को ठहराया सेवा में कमी का दोषी

Update: 2026-06-18 15:57 GMT

बिहार के भोजपुर, आरा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कन्फर्म आरक्षित टिकट होने के बावजूद यात्रियों को उनकी सीट उपलब्ध न कराने पर उत्तर मध्य रेलवे और रेल मंत्रालय को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने रेलवे को टिकट राशि लौटाने के साथ मुआवजा और मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया।

मामले में शिकायतकर्ता ने अपने तीन साथियों के साथ विंध्याचल से आरा जाने के लिए ट्रेन संख्या 13202 एलटीटी-पटना एक्सप्रेस में चार कन्फर्म टिकट बुक किए थे। सभी यात्रियों को कोच बी-4 में आरक्षित सीटें आवंटित की गई थीं, जिसके लिए कुल ₹1,876.80 का किराया अदा किया गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, ट्रेन में चढ़ने पर उनकी आरक्षित सीटों पर कुछ लोग बैठे मिले, जिन्होंने खुद को रेलवे कर्मचारी बताया। सीट खाली करने के अनुरोध के बावजूद उन्होंने सीट नहीं छोड़ी। शिकायतकर्ता ने रेलवे हेल्पलाइन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप उन्हें और उनके साथियों को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी।

रेलवे ने आयोग के समक्ष तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की नहीं बल्कि सरकारी रेलवे पुलिस की है। हालांकि आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता के पास वैध कन्फर्म टिकट और आरक्षित सीटें थीं, फिर भी रेलवे उन्हें उनकी सीट उपलब्ध कराने में विफल रहा।

आयोग ने माना कि इस कारण यात्रियों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, जो रेलवे की सेवा में कमी को दर्शाता है। इसके चलते आयोग ने रेलवे को ₹1,876.80 की टिकट राशि 8% वार्षिक ब्याज सहित लौटाने, ₹20,000 मुआवजा तथा ₹15,000 वाद व्यय देने का निर्देश दिया। आदेश का पालन 60 दिनों के भीतर न होने पर राशि पर 10% वार्षिक ब्याज देय होगा।

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