सलमान खान के खिलाफ वारंट जारी करने पर NCDRC की जिला आयोग को फटकार, कहा- 'शैडो मार्केटिंग' और भ्रामक विज्ञापन में अंतर समझने की भी कोशिश नहीं की

Update: 2026-07-04 10:56 GMT

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में अभिनेता सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट और अन्य आदेश जारी करने पर जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग ने कहा कि जिला आयोग ने भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) और शैडो मार्केटिंग (Shadow Marketing) के बीच अंतर समझने का न्यूनतम प्रयास भी नहीं किया।

जस्टिस ए.पी. साही और सदस्य भरतकुमार पंड्या की पीठ ने कहा कि जिला आयोग ने ऐसे आदेश पारित किए मानो सलमान खान और कंपनी पहले ही कानून का उल्लंघन कर चुके हों, जबकि न तो मुकदमे की सुनवाई हुई थी और न ही कोई साक्ष्य रिकॉर्ड किया गया था। आयोग ने यह भी पाया कि 6 जनवरी 2026 का अंतरिम आदेश एकपक्षीय (Ex Parte) था और उसके बाद बिना पर्याप्त अवसर दिए अभिनेता के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिए गए।

मामला 'सिल्वर कोटेड इलायची' के विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें सलमान खान ब्रांड एंबेसडर हैं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस विज्ञापन का इस्तेमाल राजश्री पान मसाला के प्रचार के लिए किया जा रहा है। हालांकि, NCDRC ने कहा कि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि उत्पाद में तंबाकू या निकोटीन नहीं है, लेकिन जिला आयोग ने इस पहलू का कोई प्रारंभिक मूल्यांकन तक नहीं किया।

आयोग ने यह भी कहा कि जिला आयोग ने बिना सुनवाई के अंतरिम आदेश को अंतिम मानते हुए आगे की कार्रवाई की, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। चूंकि इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही कार्यवाही पर रोक लगा चुका है, NCDRC ने सलमान खान की अपील का निस्तारण करते हुए जिला आयोग को हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार करने का निर्देश दिया।

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