एयर इंडिया एक्सप्रेस ने IAS अधिकारी और परिवार को फ्लाइट में चढ़ने से रोका, चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने ठहराया दोषी
चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-I ने एयर इंडिया एक्सप्रेस को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए एक IAS अधिकारी और उनके परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
आयोग ने कहा कि एयरलाइन किसी यात्री को मनमाने तरीके से “नो शो” घोषित नहीं कर सकती, जब उसने समय पर चेक-इन प्रक्रिया पूरी कर ली हो और निर्धारित समय से पहले बोर्डिंग गेट पर पहुंच गया हो।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता IAS अधिकारी अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे के साथ जून 2024 में दुबई घूमने गए थे। वापसी के लिए उन्होंने दुबई से अमृतसर तक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-192 के टिकट प्रति यात्री ₹18,420 में बुक कराए थे।
शिकायतकर्ताओं का कहना था कि वे निर्धारित उड़ान समय से करीब ढाई घंटे पहले दुबई एयरपोर्ट पहुंच गए थे और सभी चेक-इन औपचारिकताएं पूरी कर बोर्डिंग पास प्राप्त कर लिए थे, जिनमें बोर्डिंग गेट बंद होने का समय सुबह 08:25 बजे दर्ज था।
शिकायत के मुताबिक, परिवार तय समय से पहले बोर्डिंग गेट पर पहुंच गया था, लेकिन एयरलाइन स्टाफ ने उन्हें यह कहते हुए विमान में चढ़ने से रोक दिया कि बोर्डिंग पूरी हो चुकी है। जबकि उस समय अन्य यात्रियों को विमान में प्रवेश दिया जा रहा था। इसके बाद परिवार को भारत लौटने के लिए जयपुर होते हुए वैकल्पिक टिकट खरीदने पड़े, जिन पर ₹1,26,771 अतिरिक्त खर्च हुआ।
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने आयोग में दलील दी कि शिकायतकर्ता समय पर बोर्डिंग गेट पर नहीं पहुंचे थे और इसलिए उन्हें “नो शो” माना गया।
हालांकि आयोग ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और बोर्डिंग पासों के आधार पर पाया कि शिकायतकर्ताओं ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूरी की थीं और एयरलाइन उनके बोर्डिंग से इनकार करने का कोई ठोस कारण नहीं बता सकी।
आयोग ने माना कि एयरलाइन की लापरवाही के कारण शिकायतकर्ताओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा।
आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एयर इंडिया एक्सप्रेस को वैकल्पिक यात्रा खर्च के रूप में ₹1,26,771 का भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, ₹15,000 मानसिक पीड़ा के लिए और ₹10,000 मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर देने का आदेश भी दिया।