ग्राहक की सहमति के बिना बैंक खाते की जानकारी किसी तीसरे पक्ष से साझा नहीं कर सकता बैंक: उपभोक्ता आयोग

Update: 2026-07-08 08:05 GMT

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखीमपुर खीरी ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को ग्राहक की सहमति के बिना उसके बैंक खाते का विवरण तीसरे पक्ष को साझा करने के मामले में सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि बैंक ग्राहक की निजी बैंकिंग जानकारी उसकी अनुमति के बिना किसी तीसरे पक्ष को साझा नहीं कर सकता।

मामला पंकज कुमार शुक्ला का है, जिनका एसबीआई की हरगांव शाखा में बचत खाता था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ पीठ में लंबित एक श्रम विवाद के दौरान उनके नियोक्ता गोविंद शुगर मिल को बैंक ने उनके खाते का विवरण उपलब्ध कराया। उनका कहना था कि इससे उन्हें मानसिक पीड़ा हुई।

बैंक ने दलील दी कि वेतन भुगतान के मिलान (Reconciliation) के लिए नियोक्ता के अनुरोध पर खाते का विवरण साझा किया गया था और इसमें कोई अनियमितता नहीं थी।

हालांकि, आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता का बचत खाता उसका व्यक्तिगत खाता था और उसकी सहमति के बिना जानकारी साझा करना बैंकिंग गोपनीयता का उल्लंघन है। इसे सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने एसबीआई को ₹20,000 मुआवजा, शिकायत दायर करने की तिथि से 6% वार्षिक ब्याज सहित, तथा ₹5,000 वाद व्यय अदा करने का निर्देश दिया।

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