अनुकंपा नियुक्ति का मतलब तुरंत मदद देना, न कि दशकों बाद सरकारी नौकरी का ज़रिया बनना: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को राहत देने से इनकार किया, जिसने अपने पिता की मौत के 14 साल बाद बहुत ज़्यादा देरी से अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्तियों का मूल मकसद तुरंत मदद देना है, न कि मृतक की मौत के दशकों बाद सरकारी नौकरी का ज़रिया बनना।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्तियां मौत के समय की गंभीर वित्तीय ज़रूरत की स्थितियों तक ही सीमित होनी चाहिए। एक बार जब संकट खत्म हो जाता है तो अनुकंपा नियुक्ति का आधार भी खत्म हो जाता है।
इस बारे में और बताते हुए सिंगल-जज ने कहा,
“अनुकंपा नियुक्ति की योजना भर्ती के सामान्य नियम का एक छोटा सा अपवाद है। इसका मकसद सिर्फ़ सरकारी कर्मचारी की अचानक मौत के बाद परिवार को होने वाली तत्काल वित्तीय कठिनाई को कम करना है। इसका मकसद विरासत के तौर पर रोज़गार देना या कई दशकों बाद दावों को फिर से ज़िंदा करना नहीं है।”
Case Title: Nijesh Chauhan v. State of Chhattisgarh