यह उत्पीड़न का रूप: सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की कमी पर छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा हलफनामा

Update: 2026-02-27 09:54 GMT

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी और उनकी दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ वर्ष 2025 में दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान हिंदी दैनिक में प्रकाशित हालिया समाचार का संज्ञान लिया गया, जिसमें राज्यभर के स्कूलों में बालिकाओं के शौचालयों की भारी कमी और उनकी खराब हालत का उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 5,000 से अधिक स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक स्कूलों में शौचालय अत्यंत खराब स्थिति में हैं। बिलासपुर जिले का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वहां 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय की गंभीर समस्या है और 200 से अधिक स्कूलों में शौचालय तो हैं, लेकिन उपयोग योग्य नहीं हैं।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 56,615 संचालित स्कूलों में से 54,715 में बालिकाओं के लिए शौचालय उपलब्ध हैं परंतु केवल 52,545 ही उपयोग योग्य हैं। इसी प्रकार 53,142 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय हैं, लेकिन केवल 49,355 कार्यरत बताए गए हैं। इसका अर्थ है कि 4,070 स्कूलों में बालिकाओं के लिए और 7,260 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं हैं।

समाचार में यह भी उल्लेख किया गया कि शौचालयों की खराब स्थिति के कारण बच्चों और शिक्षकों को मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और वे लंबे समय से स्वच्छता मानकों में सुधार की मांग कर रहे हैं।

इन तथ्यों पर गंभीर चिंता जताते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की,

“समाचार रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों की स्थिति शर्मनाक है। बालिकाओं के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनके लिए प्रतिदिन पांच से छह घंटे स्कूल में बिताना भी कठिन हो जाता है। यह व्यवस्था बालिकाओं के विरुद्ध उत्पीड़न का एक रूप है। यही कारण हो सकता है कि अनेक छात्राएं पढ़ाई छोड़ देती हैं या विद्यालय आना बंद कर देती हैं। कई स्कूलों में लड़के और लड़कियां एक ही शौचालय का उपयोग करते हैं, जिससे छात्राओं को प्रतिदिन शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।”

अदालत ने शिक्षा मंत्रालय की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें लगभग 5,500 स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय न होने की बात सामने आई थी।

विद्यालयों के एकीकरण की प्रक्रिया के बाद स्कूलों की संख्या घटकर लगभग 38,000 रह गई, किंतु इसके बावजूद 1,000 से अधिक स्कूलों में अब भी बालिकाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, बस्तर और जांजगीर-चांपा जिलों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई।

अदालत ने यह भी कहा कि जनवरी 2025 में जनहित याचिका दर्ज होने के बावजूद जमीनी स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं दिख रहा है और छात्राओं का दैनिक जीवन अब भी प्रभावित हो रहा है।

मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को निर्धारित की गई।

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