तेलंगाना हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन रेड्डी को सीबीआई कोर्ट के समक्ष भ्रष्टाचार मामले में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी

Update: 2022-08-29 07:06 GMT

तेलंगाना हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को राहत देते हुए उन्हें वर्ष 2013 में सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मामलों की श्रृंखला में अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी।

हालांकि, उन्हें सुनवाई की ऐसी तारीखों पर अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया जहां सीबीआई अदालत फैसला करती है कि सीआरपीसी की धारा 205 की उपधारा (2) के अनुसार उनकी उपस्थिति आवश्यक है।

चीफ जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इसके साथ ही 2019 में पारित सीबीआई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें जगन की व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग को खारिज कर दिया गया था।

न्यायालय, प्रधान विशेष न्यायाधीश, सीबीआई कोर्ट, हैदराबाद द्वारा की गई इस टिप्पणी से असहमत ता कि आपराधिक कार्यवाही में अभियुक्त की उपस्थिति में मुकदमा चलाया जाना चाहिए, इसलिए व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए जगन के अनुरोध पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा,

"आरोपी की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सिद्धांत यह है कि अभियुक्त की उपस्थिति में मुकदमा चलाया जाना है; आरोपी की पीठ के पीछे कुछ भी नहीं किया जाता है। व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग का प्रावधान आरोपी के लाभ के लिए है। उनकी व्याख्या इस तरह से नहीं की जा सकती है जिससे आरोपी को कठिनाई और पूर्वाग्रह हो।"

संक्षेप में मामला

आंध्र प्रदेश के विभाजन से पहले वर्ष 2013 में सीबीआई ने जगन के खिलाफ भ्रष्टाचार के कथित कामों के संबंध में मामला दर्ज किया था, जिससे उनकी संपत्ति में अचानक वृद्धि हुई थी। ये कार्यवाही वर्तमान में सीबीआई मामलों के प्रधान विशेष न्यायाधीश, हैदराबाद की अदालत में लंबित हैं।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2019 में अपने चुनाव के बाद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए सीआरपीसी की धारा 205 के तहत सीबीआई कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। इस याचिका में कहा गया कि राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनके चुनाव को देखते हुए उन्हें पेशी से छूट दी जाए, क्योंकि उक्त पद पर रहते हुए उनका चौबीसों घंटे काम करना आवश्यक है।

उन्होंने तर्क दिया कि सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होने से प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा; चूंकि वह मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं तो अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाना है, जो राज्य राजकोष पर महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ डालने के अलावा, याचिकाकर्ता के उपस्थित होने के दिन अदालत में अन्य वादियों और वकीलों की उपस्थिति को बाधित या प्रभावित करेगा।

हालांकि, प्रधान विशेष न्यायाधीश ने अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए वर्ष 2019 में सीआरपीसी की धारा 205 के तहत दायर जगन के आवेदन को खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट के समक्ष उस आदेश को चुनौती देते हुए जगन की ओर से पेश सीनियर वकील एस निरंजन रेड्डी ने तर्क दिया कि निचली अदालत सीआरपीसी की धारा 205 के प्रावधान पर उचित परिप्रेक्ष्य में विचार करने में विफल रही, क्योंकि सीआरपीसी की धारा 205 के तहत कार्यवाही की और कितनी बारकिसी भी स्तर पर याचिका दायर की जा सकती है।

आगे यह तर्क दिया गया कि जगन द्वारा निर्वहन की गई जिम्मेदारियों और कर्तव्यों की प्रकृति को देखते हुए मामले की सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति पर जोर देना बिल्कुल भी उचित नहीं है।

अंत में यह तर्क दिया गया कि जब अन्य अभियुक्त व्यक्तियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान की गई तो यह समझ से परे है कि निचली अदालत सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति पर जोर क्यों दे रही है।

केस टाइटल- वाईएस जगन मोहन रेड्डी बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Tags:    

Similar News