श्रीलंका के जज पहुंचे कर्नाटक हाईकोर्ट, अपने खिलाफ ऑनलाइन कंटेंट हटाने की मांग

Update: 2026-03-06 07:31 GMT

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार (5 मार्च) को श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस अहमद नवाज़ की रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में भारत के संविधान के तहत उनके "भूल जाने के अधिकार" का इस्तेमाल करते हुए कुछ कथित रूप से बदनाम करने वाले कंटेंट को हटाने की मांग की गई।

याचिका में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के साथ-साथ गूगल इंडिया को पिटीशनर के बारे में सभी कथित रूप से बदनाम करने वाले कंटेंट को हटाने और इसी तरह के कंटेंट को दोबारा बनाने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई।

याचिका में आगे मांग की गई कि रेस्पोंडेंट्स को URL सर्च पर पूरी तरह से बैन लगाने और याचिकाकर्ता को "उस जुर्म के लिए भुला दिया जाए" जो उसने कभी किया ही नहीं।

जस्टिस सचिन शंकर मगदुम ने अपने ऑर्डर में कहा:

"मिस्टर मनु पी कुलकर्णी, स्टैंडिंग काउंसिल को प्रतिवादी नंबर 2 और 3 के लिए नोटिस स्वीकार करने का निर्देश दिया जाता है। याचिकाकर्ता के वकील को प्रतिवादी नंबर 4 और 5 को ई-मेल के ज़रिए नोटिस देने का निर्देश दिया जाता है। याचिकाकर्ता के वकील स्टैंडिंग काउंसिल को रिट पिटीशन की कॉपी के दो सेट देंगे। इस मामले को 16.03.2026 को शुरुआती सुनवाई में फिर से लिस्ट करें।"

सेंट्रल गवर्नमेंट और गूगल को नोटिस जारी करने के अलावा, कोर्ट ने दो श्रीलंकाई न्यूज़ पब्लिकेशन – कोलंबो टेलीग्राफ और लंका ई-न्यूज़ को भी नोटिस जारी किया, जिनके बारे में कहा गया कि उन्होंने कथित बदनाम करने वाला कंटेंट पब्लिश किया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने एथिकल ग्राउंड्स पर श्रीलंका में केस फाइल नहीं करने का फैसला किया, क्योंकि देश के सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर उनकी पोजीशन को देखते हुए इससे बायस की आशंका पैदा हो सकती थी।

Case title: JUSTICE A.H.M.D NAWAZ v/s MINISTRY OF ELECTRONICS AND INFORMATION TECHNOLOGY & Ors.


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