ऐसे सुधारात्मक उपाय करें ताकि आरोपी जमानत लेने के लिए खराब चिकित्सा सुविधाओं का हवाला न दे सके: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरवर राव की याचिका खारिज करते हुए जेल अधिकारियों से कहा

Update: 2022-04-23 08:54 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जेल की स्थिति और उसमें चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए कुछ निर्देश जारी किए, ताकि भीमा कोरेगांव के आरोपी वरवर राव के साथ-साथ अन्य जेल कैदियों द्वारा की गई शिकायतों का समाधान किया जा सके और भविष्य में वे जेल की खराब चिकित्सा स्थिति के एकमात्र आधार पर ज़मानत न मांगें।

सिर्फ मेडिकल आधार पर स्थायी जमानत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

"यदि मामले पर सख्त रुख नहीं अपनाया जाता है और कमियों को दूर करने के लिए उचित निर्देश जारी नहीं किए जाते हैं तो सभी विचाराधीन कैदी इसकी शिकायत करेंगे और इस आधार पर जमानत के लिए आवेदन करेंगे।"

पीठ ने हालांकि मोतियाबिंद सर्जरी के लिए मानवीय आधार पर वरवर की जमानत तीन महीने के लिए बढ़ा दी।

जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस जीए सनप की पीठ ने कहा कि एक और मिसाल कायम करने के बजाय संभवतः जमानत देकर भविष्य में खामियों और कमियों के लिए जवाबदेही तय करने के लिए उचित निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

फरवरी, 2021 में वरवर को दी गई छह महीने की अस्थायी जमानत के दौरान हैदराबाद में अपने घर पर रहने की अनुमति देने की मांग करते हुए उन्होंने तर्क दिया था कि तलोजा जेल में उनके बचने की संभावना कम है।

कोर्ट ने कहा,

"हम महानिरीक्षक जेल महाराष्ट्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि अब से कैदियों के लिए मेडिकल सुविधाओं की कमी और समय पर चिकित्सा सहायता के बारे में शिकायत करने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसे उपलब्ध कराया जाएगा और महाराष्ट्र जेल (जेल) अस्पताल) नियम, 1970 के संदर्भ में सख्ती से लागू किया जाएगा।"

पीठ ने जिम्मेदारी तय करते हुए कहा,

"महानिरीक्षक को मामलों के दायरे में गैर-अनुपालन और भविष्य में चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।"

दिशा-निर्देश

1.आईजी जेल, महाराष्ट्र विशेष रूप से तलोजा सेंट्रल जेल से और सामान्य रूप से महाराष्ट्र की सभी जेलों से मेडिकल अधिकारियों, नर्सिंग और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति और अन्य सुविधाओं और प्रावधानों के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए महाराष्ट्र कारागार (जेल अस्पताल) नियम, 1970 के अनुसार उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है। सुधारात्मक उपाय करें और 30 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपें।

2. मामले की अध्यक्षता कर रहे विशेष एनआईए न्यायाधीश को मुकदमे में तेजी लानी चाहिए और इसे दिन-प्रतिदिन के आधार पर सुनना चाहिए।

3.महाराष्ट्र के प्रधान जिला न्यायाधीशों से अनुरोध है कि वे अपने आवधिक दौरे के समय जेल में मेडिकल सुविधाओं पर ध्यान दें और यह सुनिश्चित करें कि महाराष्ट्र कारागार (जेल अस्पताल) नियम, 1970 के प्रावधानों का अक्षरश: पालन किया जाए।

4. विशेष एनआईए न्यायाधीश को इसमें सहयोग न करने वाले पक्षों पर ध्यान देना चाहिए।

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