पश्चिम बंगाल को छोड़ अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रही: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में यह प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई है, जबकि पश्चिम बंगाल में कुछ समस्याएं सामने आई हैं।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें SIR प्रक्रिया और “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” सूची में मतदाताओं के वर्गीकरण को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने एक लेख का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया सामान्य रूप से पूरी हुई है। इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” की श्रेणी केवल पश्चिम बंगाल में लागू की गई है और राज्य के मुख्य सचिव का आधी रात में तबादला भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा असामान्य कदम है।
चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि अन्य राज्यों, जैसे गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण हुआ है।
सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने मतदाता सूची फ्रीज करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की, ताकि लंबित आपत्तियों का निष्पक्ष निपटारा हो सके। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत इस अनुरोध पर विचार करेगी।
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि अदालत के पूर्व निर्देशों के तहत अपीलों की सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों द्वारा लगभग 27 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि अधिकांश मुद्दे प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिनका समाधान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा किया जाना चाहिए।
पूरक मतदाता सूचियों के प्रकाशन को लेकर भी मुद्दा उठा, जिस पर चुनाव आयोग ने कहा कि वह इन्हें प्रतिदिन जारी करने को तैयार है और इस संबंध में प्रस्ताव हाईकोर्ट को भेजा गया है।
अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकांश लॉजिस्टिक कार्य हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंप दिए गए हैं और यदि किसी पक्ष को कठिनाई हो तो वह अदालत के समक्ष रखी जा सकती है। न्यायमूर्ति बागची ने यह भी सुझाव दिया कि पहले चरण में चुनाव वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए।
अदालत ने इस प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों के कार्यभार पर भी चिंता जताई और कहा कि दो लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा बिना अवकाश लिए किया जा रहा है।
मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होने की संभावना है।